सवाल लोकतंत्र में परिवर्तन का है-
भारतीय राजनीति की अंतरात्मा को परिवर्तित करने के लिए देश के नागरिकों को स्वयं का चरित्र भी परिवर्तित करना होगा। वेद सर! बात चीत में तल्ख़ होते हुए कहते हैं कि गुजरात को मोदी ने नहीं बल्कि गुजरात के निवासियों ने बनाया है। वहां की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ऐसी है कि वहां विकास हुआ और होगा। इसके बरक्स दिल्ली और यू पी में क्या है? एक सवाल जो अहम है उसे वे रखते हैं। यू पी में गुंडे और मवाली सड़क पर लड़कियों और समाज के साथ बदसलूकी करते हैं तब क्यों वहां पर आस पास खड़े लोग प्रतिरोध नहीं करते। आशुतोष सर और वन्दना भाभी जी ने संघर्षों के दिन में मेरी बहुत मदद की है। वेद सर तो मेरे अध्यापक ही रहे हैं। वे अध्यापक के रूप में सख्त लेकिन आदमी के रूप में बेहतर इंसान हैं। ऐन वक्त पर वे गंभीर रूप से चेताते हैं। एक दिन राजनीति करने वालों पर मैंने एक तल्ख़ टिप्पणी की थी। वहां शब्द अमर्यादित थे। लेकिन समाज की हर औरत देवी क्या मनुष्य भी नहीं होती। मैंने परिवार परामर्श केंद्र में परामर्श देते हुए देखा है कि अतिरिक्त वैवाहिक संबंधों की वजह से परिवार टूट रहे हैं। देख रहा हूँ हर चुनावों के बाद जनता छली जाती है। आखिर हम कहाँ जाएँ ? किसको वोट दें? हमें जन्नत की हकीकत मालूम है! सियासत में हुकूमत के चेहरे बदलेंगे लेकिन चरित्र वही रहेगा! इतिहास वही है। Wednesday, 30 April 2014
Tuesday, 29 April 2014
सभी मित्रों से एक सवाल-
जिस राज में महत्वपूर्ण ओहदों पर जाति विशेष के लोगों की तैनाती हो। जिस राज में जाति विशेष का आदमी सिविल सेवाओं अथवा लोक सेवाओं की भर्ती बोर्ड का अध्यक्ष बन जाता हो। जिस राज में भर्तियां फ़ार्म भरने के तीन से पांच साल बाद होती हों। जिस राज में बिजली का २४ घंटा रहना अचम्भे की बात हो। जिस राज में रात में चलने का मतलब जान जोखिम में डालना हो। जिस राज में हर महीने डीजल की कीमत 50 पैसे बढ़ जाती हो। जिस राज में चपरासी से लेकर अधिकारी तक की नियुक्तियों में रिश्वतखोरी चरम पर हो। जिस राज में किसान आन्दोलनों को जन्म ही न लेने दिया गया हो। जिस राज में मजदूरों को मनरेगा के माध्यम से रिश्वतखोर बना दिया गया हो। जिस राज में स्नातक होते होते लड़का बुजुर्ग की श्रेणी में गिना जाने लगे। वही मतलब चार साला ग्रैजुएशन हो गया हो। इन ढेर सारे मसलों पर जनवादी अग्रज, मार्क्सवादी गुरुजन, खांटी कम्युनिस्ट, समाजवादी चिंतक और दिशा निर्धारक विद्वतजन यदि चुप्पी साधे हुए हैं तो उन्हें अपनी चुप्पी तोड़नी ही चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि मोह पाश से मुक्त होकर योग्यता और दक्षता के आधार पर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां कब होंगी ? कब देश में वास्तविक जनतंत्र आएगा। Monday, 28 April 2014
Thursday, 24 April 2014
जब काम सिर चढ़कर बोलता है-
जब काम सिर चढ़कर बोलता है-
बुद्धिवादियों! की बकैती भी अजब है। लोग देख रहे थे कि घरों में से लोग मोदी की एक झलक पाने को बेताब थे। इस पर भी बार बार यह कह कर मन को दिलासा दे रहे हैं कि भीड़ बाहर वाली थी। जो भी हो। इतना तो तय है कि मोदी के साथ भारतीय जनता थी। विदेशी नहीं। भारतीय वोटर अपने अपने लोकसभा क्षेत्रों में भारतीय राजनीति का तख्ता पलट कर रहे हैं? फिर टेंशन काहे की बंधु ! दिल को खुश रखने का यह ख़याल अच्छा है।
Wednesday, 23 April 2014
मित्रों! इतिहास सृजन में अवदान सुनिश्चित करें-
मित्रों! इतिहास सृजन में अवदान सुनिश्चित करें-
सदन में शक्ति परीक्षण के दौरान देश की संसद अंतरात्मा के आधार पर वोट करने की अपील करती है। मुल्क की अवाम से एक अपील- साथियों! दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का इतिहास रचा जा रहा है। आप जाति, धर्म, सम्प्रदाय, उन्माद, पूर्वाग्रह, क्षेत्रवाद और अन्यान्य दुराग्रहों से ऊपर उठकर अपनी अंतरात्मा के आधार पर विकास और सद्भावना के नाम पर वोट कीजिए। मतदेय स्थल तक अवश्य जाएँ और अपने अमूल्य मत का प्रयोग करें। भारत माता की जननी, बेटी और भगिनी भी अपने अमूल्य मताधिकार का प्रयोग करें। आप उत्पीड़ित हैं। …आप मताधिकार का प्रयोग करके ही अपनी अस्मिता सुरक्षित रख सकती है.. मातृ शक्ति की जय हो राष्ट्र शक्ति की जय हो! Wednesday, 16 April 2014
स्वर्णिम इतिहास सृजन के लिए मतदान अवश्य करें-
लोकतंत्र विमर्शों के धरातल पर नहीं अपितु जनता की सदिच्छा पर जमीनी सच्चाई को उजागिर करती है। सत्ता तंत्र की लूट से समस्त भारतीय जनता कराहती रही है। २० वीं सड़ी के भ्रष्टाचार ने करोड़ो भारतीय जनता को प्रभावित किया है। जिम्मेदार ओहदेदारों द्वारा अमीर और गरीब के बीच बहुत गहरी खाई खोद दी गई है। इस देश की ७५ प्रतिशत आबादी के पास काम नहीं है। युवाओं के हाथ गरीबी से तंग हैं। अपने सपनों के भारत निर्माण के लिए अपने वोट को सोच समझकर पोल कीजिये। ध्यान रखिये आप को हर हालत में बूथों तक जाना है ताकि देश का स्वर्णिम इतिहास लिखा जा सके। ध्यान दीजिये भारतीय होने के कारण ही आप को मतदान का अधिकार है।
लोकतंत्र विमर्शों के धरातल पर नहीं अपितु जनता की सदिच्छा पर जमीनी सच्चाई को उजागिर करती है। सत्ता तंत्र की लूट से समस्त भारतीय जनता कराहती रही है। २० वीं सड़ी के भ्रष्टाचार ने करोड़ो भारतीय जनता को प्रभावित किया है। जिम्मेदार ओहदेदारों द्वारा अमीर और गरीब के बीच बहुत गहरी खाई खोद दी गई है। इस देश की ७५ प्रतिशत आबादी के पास काम नहीं है। युवाओं के हाथ गरीबी से तंग हैं। अपने सपनों के भारत निर्माण के लिए अपने वोट को सोच समझकर पोल कीजिये। ध्यान रखिये आप को हर हालत में बूथों तक जाना है ताकि देश का स्वर्णिम इतिहास लिखा जा सके। ध्यान दीजिये भारतीय होने के कारण ही आप को मतदान का अधिकार है।
Monday, 14 April 2014
सवाल दर सवाल-
भारत का नागरिक होने के नाते मुझे मत देने और मतदान करने का अधिकार है। विलुप्त हो रही प्रशासनिक दक्षता के बीच मोदी ने अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया है। मैं न तो आर एस एस का हूँ और न ही बी जे पी अथवा किसी अन्य सियासी दल का, लेकिन एक बात जो देखता हूँ उसे साफगोई से कहने में कोई गुरेज भी नहीं है। मोदी में विकासात्मक प्रतिबद्धता, राजनैतिक चातुर्य और संकल्पित राजधर्म है। हिन्दुस्तान के एक हज़ार वर्षों के इतिहास में हिन्दू उत्पीड़न की ढेर सारी घटनाएँ हैं जबकि इस्लामिक उत्पीड़न की महज एक घटना जो हादसा थी। यह जो इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतें हैं, उनसे सिर्फ एक सवाल कि मोदी ने गुजरात का विकास धर्म के आधार पर किया? क्या गुजरात की तरक्की से मुसलमानों का लाभ नहीं हुआ ? क्या मुजफ्फर नगर के दंगे के लिए भी मोदी ही जिम्मेदार हैं? क्या आतंकवादियों को इस लिए छोड़ दिया जाना चाहिए कि वे इस्लाम धर्म के मानने वाले हैं ? मोदी के अलावा देश की अथवा उसके राज्यों को सरकारों को न्यायपालिका क्यों संचालित कर रही हैं? मोदी के अलावा देश का कोई नेता भारत माता की जय क्यों नहीं बोलता ? देश की सरकारें इस्लामिक तुष्टीकरण में क्यों जुटी हैं ? इस देश की मेधा शक्ति विदेश जाने को क्यों मजबूर है? क्यों देश के विश्वविद्यालयों में ईमानदारी से शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं होती? इस देश की शिक्षा व्यवस्था क्यों बेरोजगारों को पैदा करती है? इसीलिए हमारी निगाह मोदी पर ठिठकती है कि देश के समक्ष ढेर सारी चुनौतियों से वे आम जनता को निजात दिला सकते हैं ? Sunday, 13 April 2014
प्रशासनिक दक्षता और मोदी-
संकल्पित राजधर्म गुंडई, आतंकवाद के साथ अलोकतांत्रिक आचरण और मर्यादाओं पर अंकुश लगाती है। मोदी का विरोध करने वालों से एक सवाल- मुसलमानों के खिलाफ मोदी ने कभी कुछ बोला?,,,,,,,रही बात गुजरात दंगों की तो उसमें सभी कौमों के लोगों की मौत हुई थी। लेकिन तथ्य यह भी है कि भारत के एक हजार वर्षों के इतिहास में धार्मिक उन्माद के नाम पर मुसलमानों पर पहली बार हमला हुआ था। ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि सिकंदर लोदी से लेकर औरंगजेब तक के शासनकाल में जेहाद के नाम पर हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ था। भारतीय इतिहास में धार्मिक रूपांतरण की न जाने कितने ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं। Friday, 11 April 2014
तो विकसित होगा देश और दुरुस्त होगी संसद-
इस बार अपराधियों ,गुंडों की खैर नहीं है। जनता बिकने को भी नहीं तैयार है। जातिवाद का नारा न तो यू पी और न ही बिहार में काम कर रहा है। पिछड़े वर्ग के मतदाता कहते हैं कि इस बार लोकसभा चुनावों में मोदी और अगली बार विधानसभा में मुलायम। दलित बिरादरी के मतदाताओं में भी कमोबेश यही राय है इस बार मोदी और विधानसभा चुनावों में मायावती। यही हालत बिहार में भी है.…इस बार मोदी और विधानसभा में नितीश। खैर ……इतना जरूर है कि 25 वर्षों बाद देश की संसद विकास के नारों पर गठित होने जा रही है। 1989 के चुनावों के बाद देश के आम चुनाव मंडल, कमंडल, जातिवाद और सम्प्रदायवाद पर लड़े गए.……। इस बार वोट विकास की भूख, नौजवानों को रोजगार, किसान को खाद-पानी, बिगड़ी हुई क़ानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर पड़ रहे हैं। आम जनता सब समझ रही है।
पारसमणि मोदी की जादुई छड़ी-
मोदी के आँखों में विकास की भूख है। बिना सत्तानशीं हुए विकास की चौखट नहीं लांघी जा सकती। जनता इस समय स्वयं को स्वर्ण बनाने पारसमणि "मोदी" पर टकटकी लगाये बैठी है। हताश, निराश और पराजित आम जन मानस को मोदी को वोट देने के अलावा दूसरा रास्ता भी नहीं बचा है! ऐसा मैं नहीं देश की जनता कहती है। Tuesday, 18 March 2014
बी जे पी राजनाथ खुद नहीं चाहते कि मोदी प्रधानमंत्री बनें-
सूत्र बताते हैं कि राजनाथ सिंह खुद नहीं चाहते कि बी जे पी को स्पष्ट जनादेश मिले, कारण यदि बी जे पी को पूर्ण बहुमत मिला तभी मोदी प्रधान मंत्री बन पाएंगे अन्यथा जोड़ तोड़ और गठबंधन की दशा में राजनाथ ही ही प्रधान मंत्री पद के साझा दावेदार होंगे। राजनाथ ने किस तरह से कल्याण सिंह के पर कतरे थे, सभी को याद होगा! लोकसभा के टिकट वितरण में बी जे पी के जनाधार वाले नेताओं को किस तरह डिस्टर्ब किया गया है। किस तरह बलिया से लेकर बाराबंकी तक के भौगोलिक क्षेत्र में सियासी क्षत्रप की परम्परा को कायम रखा गया है। राम विलास वेदांती को डिस्टर्ब किया गया। सूर्य प्रताप शाही डिस्टर्ब किये गए। लाल जी टंडन बेकार हो गए। राजनाथ सिंह गाज़ियाबाद से सांसद निर्वाचित होने के बाद क्षेत्र में कम घूमे। उनकी मजबूरी है कि वे गाज़ियाबाद से हट जाते। मुरली मनोहर जोशी को उपेक्षित किया गया। मोदी के लिए विपक्ष नहीं बल्कि राजनाथ ही काफी हैं!
सूत्र बताते हैं कि राजनाथ सिंह खुद नहीं चाहते कि बी जे पी को स्पष्ट जनादेश मिले, कारण यदि बी जे पी को पूर्ण बहुमत मिला तभी मोदी प्रधान मंत्री बन पाएंगे अन्यथा जोड़ तोड़ और गठबंधन की दशा में राजनाथ ही ही प्रधान मंत्री पद के साझा दावेदार होंगे। राजनाथ ने किस तरह से कल्याण सिंह के पर कतरे थे, सभी को याद होगा! लोकसभा के टिकट वितरण में बी जे पी के जनाधार वाले नेताओं को किस तरह डिस्टर्ब किया गया है। किस तरह बलिया से लेकर बाराबंकी तक के भौगोलिक क्षेत्र में सियासी क्षत्रप की परम्परा को कायम रखा गया है। राम विलास वेदांती को डिस्टर्ब किया गया। सूर्य प्रताप शाही डिस्टर्ब किये गए। लाल जी टंडन बेकार हो गए। राजनाथ सिंह गाज़ियाबाद से सांसद निर्वाचित होने के बाद क्षेत्र में कम घूमे। उनकी मजबूरी है कि वे गाज़ियाबाद से हट जाते। मुरली मनोहर जोशी को उपेक्षित किया गया। मोदी के लिए विपक्ष नहीं बल्कि राजनाथ ही काफी हैं!
Sunday, 16 March 2014
होली मुबारक। दोगली सियासत करने वाले जनता से आदेश मांग रहे हैं। जनता चाहेगी तब सरकार बनाएंगे। जनता कहेगी तब चुनाव लड़ेंगे। क्या बेहूदगी है! लोकतंत्र में हाँथ नहीं उठाये जाते। यहाँ मतदान होता है। चुनाव जनता नहीं, राजनैतिक दल लड़ाते हैं। पहले सियासी मैदान में आओ फिर जनादेश का इंतज़ार करो। बार बार जनता को काहे को उल्लू बनाते हो भाई!
Thursday, 27 February 2014
यह नेताओं की सियासी फ़ितरत है-
विनय कांत मिश्र। भारतीय राजनीति इन दिनों उल्टी टंगी है। सत्ता सुख हासिल कर रहे नेताओं की दलीय प्रतिबद्धता का कोई मतलब नहीं है। संसद में सांसद के रूप में प्रवेश की मनः स्थिति ने नेताओं को दोगली राजनीति का शिकार बनाया है। एक दर्जन से अधिक कांग्रेसी नेता इन दिनों मोदी के तलवे चाटने के लिए बेताब है। 2 मार्च को लखनऊ की रैली में सियासी बेशर्मी की हदें पार होंगी। कई नेता पाला बदल कर इस पार से उस पार जाएंगे।
किसी जमाने में कांग्रेस
Saturday, 1 February 2014
वक्त ने किया क्या हंसी सितम-
कोलकाता में सुभाष बाबू के खिलाफ पर्चे क्यों वितरित करवाये गए थे? क्या गांधी जी न होते तो भारत आज़ाद न होता! वाया कांग्रेस सुभाष बाबू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नहीं हो सकते थे! क्या सुभाष बाबू की चलती तो पाकिस्तान बनता! भगत सिंह की फांसी की सजा माफ़ नहीं करवाई जा सकती थी ! गांधी बाबा ने पाकिस्तान बनने के साथ ही भारत से उसे हर्जाना क्यों दिलवाया! गांधी जी सुभाष बाबू को कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में क्यों नहीं बर्दाश्त कर सके? सवाल बहुतेरे हैं ? असल में गांधी जी के साथ भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन का ढेर सारा मिथक जोड़ दिया गया! इन मिथकों के साथ ही अन्य स्वतन्त्रता सेनानियों का अवदान विस्मृत कर दिया गया! Sunday, 26 January 2014
लोकतंत्र, अधिकारों का ही नहीं राष्ट्र के नागरिकों को कर्त्तव्यबोध का पाठ भी पढ़ाता है। "हमारी मांगे पूरी हों चाहे जो मजबूरी हो", मजबूरी को सरकारी ही नहीं निजी क्षेत्रों में कामगार तबके को समझना चाहिए। कई बार सोचता हूँ- क्या मजदूर आन्दोलनों और हड़तालों ने देश के विकास की गति को अवरुद्ध नहीं किया है। संसाधन होगा तभी मजबूती आएगी। "हाँ देश के नागरिकों में संसाधनों का समान वितरण अहम् मसला है। "" दुनिया भर के इतिहास बोध यही संकेत करते हैं कि आंदोलन और हड़ताल महज स्वार्थी नेता और शासक पैदा करते हैं जो कालांतर में खुद शोषक बन जाते हैं। होंगे इक्का दुक्का अपवाद। मजदूर आन्दोलनों का दूरगामी दुष्परिणाम यह हुआ कि अब आम परिवार और समाज से निकलकर लोकतांत्रिक नेतृत्व ख़ास परिवारों और समाज की रखैल बन बैठी। क्यों, क्या ख़याल है दोस्तों!
Sunday, 19 January 2014
जायसी को पढ़ते हुए -
"बरसै मघा झकोरि झकोरी । मोर दुइ नैन चुवैं जस ओरी॥
***
नैन चुवहिं जस महवट नीरू । तोहि बिनु अंग लाग सर चीरू॥"
मघा नक्षत्र में हवा बहुत तेज चलती है( मुख्यतः फैजाबाद, गोंडा,सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और जौनपुर विशेष रूप से अवध प्रान्त की जलवायु से प्रभावित क्षेत्र हैं। ) जायसी सुल्तानपुर के तत्कालीन जायस गाँव और वर्त्तमान में जायस स्टेशन के रहने वाले थे। जायस अवध प्रांत का मध्यवर्ती क्षेत्र है। जायसी का यह वर्णन मर्मस्पर्शी है। मघा नक्षत्र की वर्षा भयंकर रूप से झकझोर देने वाली होती है। लेकिन उसमें शीतलता कम होती है। परन्तु माघ महीना (शिशिर ऋतु ) में भी इस क्षेत्र में बारिश होती है। यह वर्षा बहुत दुखद होती है। इसका पानी इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए ठंडी के कारण बाण के समान बेधक( मारक ) लगता है। कपड़े भी पहले पहनने पर प्रायः ठन्डे लगते हैं। यहाँ तक कि इस ऋतु में बिस्तर पर जाते समय जो कपड़े ओढ़ने होते हैं , वे भी शुरुआत में पहले ठन्डे लगते हैं। यह बात दूसरी है कि थोड़ी देर में शरीर की गर्मी से वे गर्म होकर सुखद हो जाते हैं। शिशिर ऋतु माघ से प्रारम्भ होकर फाल्गुन तक रहता है। इसमें जो पानी बरसता है, उसे महवट, महावट या मघवट कहते हैं। भाषा विज्ञान में ऐसा परिवर्तन उच्चारण भेद से सम्भव है। इन्हीं महीनों में माघ का अंतिम छः दिन और फाल्गुन का प्रारम्भिक छः दिन अर्थात इन बारह दिनों को यहाँ के निवासी चमर बरहा (चमन बाराह ) कहते हैं। इन बारह दिनों में पानी तो यहाँ प्रायः बरसता ही है। यह पानी बाण के समान बेधक लगता है। जायसी ने मघा नक्षत्र के पानी को झकझोर देने वाला तो कहा ही किन्तु उनका मन रानी नागमती की दुर्बल काया को देखकर संतुष्ट नहीं हुआ इसलिए उन्होंने मघा नक्षत्र के बारिश की तुलना महवट के नीर से की है । अब इसमें मघा नक्षत्र की वर्षा का झकझोरत्व और नागमती के नाजुक बदन के लिए मघा की वह बारिश भी उतनी ही भयंकर प्रतीत हो रही थी जितनी कि महवट की बारिश । यहाँ मघा नक्षत्र की वर्षा उपमेय है और महवट की बारिश उपमान है।
Saturday, 18 January 2014
जायसी को पढ़ते हुए -
"बरसै मघा झकोरि झकोरी ।
मोर दुइ नैन चुवैं जस ओरी॥
***
नैन चुवहिं जस महवट नीरू । तोहि बिनु अंग लाग सर चीरू॥"
मघा नक्षत्र में हवा बहुत तेज चलती है( मुख्यतः फैजाबाद, गोंडा,सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और जौनपुर विशेष रूप से अवध प्रान्त की जलवायु से प्रभावित क्षेत्र हैं। ) जायसी सुल्तानपुर के तत्कालीन जायस गाँव और वर्त्तमान में जायस स्टेशन के रहने वाले थे। जायस अवध प्रांत का मध्यवर्ती क्षेत्र है। जायसी का यह वर्णन मर्मस्पर्शी है। मघा नक्षत्र की वर्षा भयंकर रूप से झकझोर देने वाली होती है। लेकिन उसमें शीतलता कम होती है। परन्तु माघ महीना (शिशिर ऋतु ) में भी इस क्षेत्र में बारिश होती है। यह वर्षा बहुत दुखद होती है। इसका पानी इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए ठंडी के कारण बाण के समान बेधक( मारक ) लगता है। कपड़े भी पहले पहनने पर प्रायः ठन्डे लगते हैं। यहाँ तक कि इस ऋतु में बिस्तर पर जाते समय जो कपड़े ओढ़ने होते हैं , वे भी शुरुआत में पहले ठन्डे लगते हैं। यह बात दूसरी है कि थोड़ी देर में शरीर की गर्मी से वे गर्म होकर सुखद हो जाते हैं। शिशिर ऋतु माघ से प्रारम्भ होकर फाल्गुन तक रहता है। इसमें जो पानी बरसता है, उसे महवट, महावट या मघवट कहते हैं। भाषा विज्ञान में ऐसा परिवर्तन उच्चारण भेद से सम्भव है। इन्हीं महीनों में माघ का अंतिम छः दिन और फाल्गुन का प्रारम्भिक छः दिन अर्थात इन बारह दिनों को यहाँ के निवासी चमर बरहा (चमन बाराह ) कहते हैं। इन बारह दिनों में पानी तो यहाँ प्रायः बरसता ही है। यह पानी बाण के समान बेधक लगता है। जायसी ने मघा नक्षत्र के पानी को झकझोर देने वाला तो कहा ही किन्तु उनका मन रानी नागमती की दुर्बल काया को देखकर संतुष्ट नहीं हुआ इसलिए उन्होंने मघा नक्षत्र के बारिश की तुलना महवट के नीर से की है । अब इसमें मघा नक्षत्र की वर्षा का झकझोरत्व और नागमती के नाजुक बदन के लिए मघा की वह बारिश भी उतनी ही भयंकर प्रतीत हो रही थी जितनी कि महवट का बारिश । यहाँ मघा नक्षत्र की वर्षा उपमेय है और महवट की बारिश उपम***
नैन चुवहिं जस महवट नीरू । तोहि बिनु अंग लाग सर चीरू॥"
लोकतंत्र में सिर गिना जाता है। गाँवों के अधिकाँश सिरों के बटन दारू के बल पर दबते हैं। होंगे इक्का दुक्का उर्वर मष्तिष्क के लोग, जिन्हें बिकने का खामियाजा पता होगा। प्रधानी के चुनाव में प्रति वोट रेट 500 रूपये है। यह दर विधान सभा चुनावों में 250 रूपये प्रति बटन हो जाती है। लोकसभा चुनाव में 100 रूपये में ही काम चलेगा। जितना बड़ा चुनाव उतना कम प्रति व्यक्ति रेट। यह है असली लोकतंत्र।
Tuesday, 14 January 2014
Monday, 13 January 2014
Wednesday, 8 January 2014
गरीब दवा के अभाव में मर रहा है -
भारत के अधिकाँश चिकित्सक जन सेवा की बजाय रूपया बनाने में मस्त हैं। सेवा कौन करना चाहता है बंधु ! जो काम दो रुपये की दवा से हो सकता है उसके लिए मरीज को कई दिनों तक दवा खिलाना और दवा कंपनियों के हाथों बिक जाना, मरीज को मानसिक रूप से भयभीत करना भी चिकित्सकों की आदत में शुमार है। इन दिनों भीषण ठण्ड की वजह से गरीबों की दवा के अभाव में ताबड़तोड़ मौतों का सिलसिला जारी है। कितनों के निजी चिकित्सालय में निर्धन व्यक्तियों का सेवा सुश्रूषा हो रही है।
Monday, 6 January 2014
सवाल औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का है- 2
भारतीय समाज में "न्यूनाधिक" अधिकारियों और अपराधियों के सियासत का मात्र एक ही लक्ष्य है! राजनीति में लोकसभा और विधान सभा चुनाव लड़ने का मौक़ा उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने जीवन में एक बार भी छात्र संघ का चुनाव लड़ा हो और बिना आपराधिक वारदात के छात्रसंघ का कार्यकाल पूरा किया हो। विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालयों के छात्रसंघ राजनीति की पाठशाला होते हैं। कहने का आशय यह है कि अब नेतागिरी को भी एक शालीन कैरियर के रूप में तराशा जाना चाहिए। इसमें भी उच्च शिक्षा से जुड़े हुए प्रोफ़ेसर ही योगदान दे सकते हैं।
Sunday, 5 January 2014
ऐसे तो विनाश हो जाएगा
लोकतंत्र संरक्षित रखने के लिए जो भी व्यक्ति कार्यपालिका और न्यायपालिका का एक भी दिन अंग रह चुका हो उसे किसी भी कीमत पर व्यवस्थापिका का अंग बनने को अनिवार्य रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। दरअसल व्यक्ति की मनोवृत्ति नौकरशाह अथवा न्यायिक की हो जाने के बाद तानाशाही प्रवृत्ति वाली हो जाती है। छात्र जीवन में ही करियर तय करने वाले लोग ही तीसरे अंग व्यवस्थापिका का अंग बनें। एक दूसरे के गड्ड मड्ड से लोकतंत्र का चेहरा विकृत होता है। आप देखिये देश में उच्च नौकरशाह की बीबियाँ और सेवानिवृत्त जज चुनाव लड़ रहे हैं।
Thursday, 2 January 2014
मुस्लिम से हिंदू बने परिवार को दिया राठी गोत्र लाखनमाजरा.वर्षो से लाखनमाजरा में रह रहे एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर में हवन-यज्ञ किया और हिंदू धर्म अपना लिया। ग्रामीणों ने परिवार को जाट समुदाय का राठी गोत्र दिया है। गांव निवासी राजबीर सिंह का परिवार वर्षो से गांव में रह रहा है। उसका कहना है कि उसके दादा गफूर ने उन्हें बताया था कि पहले वे भी हिंदू धर्म मानते थे, लेकिन औरंगजेब के अत्याचारों से तंग होकर उनके पूर्वजों ने मुस्लिम धर्म ग्रहण किया था। बाद में कई बार मन में टीस उठी कि दोबारा से हिंदू धर्म ग्रहण कर लें। यहां तक कि उसने अपने बच्चों की शादी भी हिंदू समुदाय में की हैं, लेकिन विधिवत तौर पर हिंदू धर्म ग्रहण नहीं किया था। उसके बच्चों की शादी में गंगोली के जाटों ने भात भरा था। उसने ग्रामीणों को कई बार हिंदू धर्म अपनाने के लिए अपने मन की बात रखी। ग्रामीणों ने भी उसकी भावनाओं को समझा। इसके लिए श्रीराम मंदिर में उसको पगड़ी बांधकर हिन्दू धर्म में शामिल कर लिया। मंदिर के पुजारी भान शर्मा ने वैदिक रीति रिवाज के साथ पूरे परिवार को हिंदू धर्म ग्रहण करवाया। इस मौके पर गांव निवासी पंडित राजेंद्र, सत्यवान, बल्लू शर्मा, बलवान नंबरदार, रामफल, सुरेश कुमार, दयानंद, बारू, बसाऊ राम, बाजेराज सहित दर्जनों ग्रामीण भी मौजूद थे। पुजारी भान शर्मा ने कहा कि राजबीर सिंह के परिवार को ग्रामीणों की सहमति से जाट समुदाय का राठी गोत्र दिया गया है।
मेरा इसे पोस्ट करने का मकसद ये बिलकुल नहीं था की इस्लाम के लोग हिंदू धर्म अपना रहे है इसके लिए में ३००० लोगो के इस्लाम से हिंदू धर्म बाले पोस्ट कर सकता था ..लेकिन ये पोस्ट कुछ खास है इसमें बताया गया है की कैसे उसके पूर्वज मुस्लमान बने अत्याचारों के कारन ..और बो खुद हिंदू बनना चाहता था लेकिन बन नहीं पा रहा था कैसे उसने फले अपनी संतानों का विवाह हिन्दुओ में किया और फिर खुद हिंदू बना ....ये बात है .... खास ... क्युकी आज भी लाखो मुस्लमान जिनके पूर्वजो को जबरदस्ती मुस्लमान बनाया गया था बो हिंदू धर्म में आना चाहते है लेकिन डर के कारन (कुरम के अनुसार इस्लाम को छोड़ने बलों को क़त्ल कर दो ) इस्लाम छोड़ नहीं प् रहे है मेरे खुद के कुछ मित्र है जो मेरे को बोलते है की इस्लाम बहुत खराब है ..लेकिन बो मजबूर है ...लेकिन कब तक ... बो बंधे रहेगे एक न एक दिन बो खुद इस्लाम को छोड़ कर डर को लात मर कर हिंदू धर्म में आ जायेगे ...ये तो बस शुरुआत है .....
Source: भास्कर न्यूज |
मुस्लिम से हिंदू बने परिवार को दिया राठी गोत्र लाखनमाजरा.वर्षो से लाखनमाजरा में रह रहे एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर में हवन-यज्ञ किया और हिंदू धर्म अपना लिया। ग्रामीणों ने परिवार को जाट समुदाय का राठी गोत्र दिया है। गांव निवासी राजबीर सिंह का परिवार वर्षो से गांव में रह रहा है। उसका कहना है कि उसके दादा गफूर ने उन्हें बताया था कि पहले वे भी हिंदू धर्म मानते थे, लेकिन औरंगजेब के अत्याचारों से तंग होकर उनके पूर्वजों ने मुस्लिम धर्म ग्रहण किया था। बाद में कई बार मन में टीस उठी कि दोबारा से हिंदू धर्म ग्रहण कर लें। यहां तक कि उसने अपने बच्चों की शादी भी हिंदू समुदाय में की हैं, लेकिन विधिवत तौर पर हिंदू धर्म ग्रहण नहीं किया था। उसके बच्चों की शादी में गंगोली के जाटों ने भात भरा था। उसने ग्रामीणों को कई बार हिंदू धर्म अपनाने के लिए अपने मन की बात रखी। ग्रामीणों ने भी उसकी भावनाओं को समझा। इसके लिए श्रीराम मंदिर में उसको पगड़ी बांधकर हिन्दू धर्म में शामिल कर लिया। मंदिर के पुजारी भान शर्मा ने वैदिक रीति रिवाज के साथ पूरे परिवार को हिंदू धर्म ग्रहण करवाया। इस मौके पर गांव निवासी पंडित राजेंद्र, सत्यवान, बल्लू शर्मा, बलवान नंबरदार, रामफल, सुरेश कुमार, दयानंद, बारू, बसाऊ राम, बाजेराज सहित दर्जनों ग्रामीण भी मौजूद थे। पुजारी भान शर्मा ने कहा कि राजबीर सिंह के परिवार को ग्रामीणों की सहमति से जाट समुदाय का राठी गोत्र दिया गया है।
मेरा इसे पोस्ट करने का मकसद ये बिलकुल नहीं था की इस्लाम के लोग हिंदू धर्म अपना रहे है इसके लिए में ३००० लोगो के इस्लाम से हिंदू धर्म बाले पोस्ट कर सकता था ..लेकिन ये पोस्ट कुछ खास है इसमें बताया गया है की कैसे उसके पूर्वज मुस्लमान बने अत्याचारों के कारन ..और बो खुद हिंदू बनना चाहता था लेकिन बन नहीं पा रहा था कैसे उसने फले अपनी संतानों का विवाह हिन्दुओ में किया और फिर खुद हिंदू बना ....ये बात है .... खास ... क्युकी आज भी लाखो मुस्लमान जिनके पूर्वजो को जबरदस्ती मुस्लमान बनाया गया था बो हिंदू धर्म में आना चाहते है लेकिन डर के कारन (कुरम के अनुसार इस्लाम को छोड़ने बलों को क़त्ल कर दो ) इस्लाम छोड़ नहीं प् रहे है मेरे खुद के कुछ मित्र है जो मेरे को बोलते है की इस्लाम बहुत खराब है ..लेकिन बो मजबूर है ...लेकिन कब तक ... बो बंधे रहेगे एक न एक दिन बो खुद इस्लाम को छोड़ कर डर को लात मर कर हिंदू धर्म में आ जायेगे ...ये तो बस शुरुआत है .....
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मेरा इसे पोस्ट करने का मकसद ये बिलकुल नहीं था की इस्लाम के लोग हिंदू धर्म अपना रहे है इसके लिए में ३००० लोगो के इस्लाम से हिंदू धर्म बाले पोस्ट कर सकता था ..लेकिन ये पोस्ट कुछ खास है इसमें बताया गया है की कैसे उसके पूर्वज मुस्लमान बने अत्याचारों के कारन ..और बो खुद हिंदू बनना चाहता था लेकिन बन नहीं पा रहा था कैसे उसने फले अपनी संतानों का विवाह हिन्दुओ में किया और फिर खुद हिंदू बना ....ये बात है .... खास ... क्युकी आज भी लाखो मुस्लमान जिनके पूर्वजो को जबरदस्ती मुस्लमान बनाया गया था बो हिंदू धर्म में आना चाहते है लेकिन डर के कारन (कुरम के अनुसार इस्लाम को छोड़ने बलों को क़त्ल कर दो ) इस्लाम छोड़ नहीं प् रहे है मेरे खुद के कुछ मित्र है जो मेरे को बोलते है की इस्लाम बहुत खराब है ..लेकिन बो मजबूर है ...लेकिन कब तक ... बो बंधे रहेगे एक न एक दिन बो खुद इस्लाम को छोड़ कर डर को लात मर कर हिंदू धर्म में आ जायेगे ...ये तो बस शुरुआत है .....
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