सभी मित्रों से एक सवाल-
जिस राज में महत्वपूर्ण ओहदों पर जाति विशेष के लोगों की तैनाती हो। जिस राज में जाति विशेष का आदमी सिविल सेवाओं अथवा लोक सेवाओं की भर्ती बोर्ड का अध्यक्ष बन जाता हो। जिस राज में भर्तियां फ़ार्म भरने के तीन से पांच साल बाद होती हों। जिस राज में बिजली का २४ घंटा रहना अचम्भे की बात हो। जिस राज में रात में चलने का मतलब जान जोखिम में डालना हो। जिस राज में हर महीने डीजल की कीमत 50 पैसे बढ़ जाती हो। जिस राज में चपरासी से लेकर अधिकारी तक की नियुक्तियों में रिश्वतखोरी चरम पर हो। जिस राज में किसान आन्दोलनों को जन्म ही न लेने दिया गया हो। जिस राज में मजदूरों को मनरेगा के माध्यम से रिश्वतखोर बना दिया गया हो। जिस राज में स्नातक होते होते लड़का बुजुर्ग की श्रेणी में गिना जाने लगे। वही मतलब चार साला ग्रैजुएशन हो गया हो। इन ढेर सारे मसलों पर जनवादी अग्रज, मार्क्सवादी गुरुजन, खांटी कम्युनिस्ट, समाजवादी चिंतक और दिशा निर्धारक विद्वतजन यदि चुप्पी साधे हुए हैं तो उन्हें अपनी चुप्पी तोड़नी ही चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि मोह पाश से मुक्त होकर योग्यता और दक्षता के आधार पर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां कब होंगी ? कब देश में वास्तविक जनतंत्र आएगा।
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