Wednesday, 30 April 2014

सवाल लोकतंत्र में परिवर्तन का है-
भारतीय राजनीति की अंतरात्मा को परिवर्तित करने के लिए देश के नागरिकों को स्वयं का चरित्र भी परिवर्तित करना होगा।  वेद सर! बात चीत में तल्ख़ होते हुए कहते हैं कि गुजरात को मोदी ने नहीं बल्कि गुजरात के निवासियों ने बनाया है।  वहां की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ऐसी है कि वहां विकास  हुआ और  होगा।   इसके बरक्स दिल्ली और यू पी में क्या है? एक सवाल जो अहम है उसे  वे रखते हैं। यू पी में गुंडे और मवाली सड़क  पर लड़कियों और समाज के साथ बदसलूकी करते हैं तब क्यों वहां पर आस पास खड़े लोग प्रतिरोध नहीं करते। आशुतोष सर और वन्दना भाभी जी ने संघर्षों के दिन  में मेरी बहुत मदद की है।  वेद सर तो मेरे अध्यापक ही रहे हैं। वे अध्यापक के रूप में सख्त लेकिन आदमी के रूप में बेहतर इंसान हैं। ऐन वक्त पर वे गंभीर रूप से चेताते हैं।  एक दिन राजनीति करने वालों पर मैंने एक तल्ख़  टिप्पणी की थी। वहां शब्द अमर्यादित थे। लेकिन  समाज की हर औरत देवी क्या मनुष्य भी नहीं होती।  मैंने परिवार परामर्श केंद्र में परामर्श देते हुए देखा है कि अतिरिक्त वैवाहिक संबंधों की वजह से परिवार टूट रहे हैं। देख रहा हूँ हर चुनावों के बाद जनता छली जाती है।  आखिर हम कहाँ जाएँ ? किसको वोट दें? हमें जन्नत की हकीकत मालूम है! सियासत में हुकूमत के चेहरे बदलेंगे लेकिन चरित्र वही रहेगा! इतिहास वही है। 

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