जब काम सिर चढ़कर बोलता है-
बुद्धिवादियों! की बकैती भी अजब है। लोग देख रहे थे कि घरों में से लोग मोदी की एक झलक पाने को बेताब थे। इस पर भी बार बार यह कह कर मन को दिलासा दे रहे हैं कि भीड़ बाहर वाली थी। जो भी हो। इतना तो तय है कि मोदी के साथ भारतीय जनता थी। विदेशी नहीं। भारतीय वोटर अपने अपने लोकसभा क्षेत्रों में भारतीय राजनीति का तख्ता पलट कर रहे हैं? फिर टेंशन काहे की बंधु ! दिल को खुश रखने का यह ख़याल अच्छा है।
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