तो विकसित होगा देश और दुरुस्त होगी संसद-
इस बार अपराधियों ,गुंडों की खैर नहीं है। जनता बिकने को भी नहीं तैयार है। जातिवाद का नारा न तो यू पी और न ही बिहार में काम कर रहा है। पिछड़े वर्ग के मतदाता कहते हैं कि इस बार लोकसभा चुनावों में मोदी और अगली बार विधानसभा में मुलायम। दलित बिरादरी के मतदाताओं में भी कमोबेश यही राय है इस बार मोदी और विधानसभा चुनावों में मायावती। यही हालत बिहार में भी है.…इस बार मोदी और विधानसभा में नितीश। खैर ……इतना जरूर है कि 25 वर्षों बाद देश की संसद विकास के नारों पर गठित होने जा रही है। 1989 के चुनावों के बाद देश के आम चुनाव मंडल, कमंडल, जातिवाद और सम्प्रदायवाद पर लड़े गए.……। इस बार वोट विकास की भूख, नौजवानों को रोजगार, किसान को खाद-पानी, बिगड़ी हुई क़ानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर पड़ रहे हैं। आम जनता सब समझ रही है।
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