Monday, 6 January 2014

सवाल औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का है- 2

भारतीय समाज में "न्यूनाधिक" अधिकारियों और अपराधियों के सियासत का मात्र एक ही लक्ष्य है! राजनीति में लोकसभा और विधान सभा चुनाव लड़ने का मौक़ा उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने  जीवन में एक बार भी छात्र संघ का चुनाव लड़ा हो और बिना आपराधिक वारदात के छात्रसंघ का कार्यकाल पूरा किया हो। विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालयों के छात्रसंघ राजनीति की पाठशाला होते हैं।  कहने का आशय यह है कि अब  नेतागिरी को भी एक शालीन कैरियर के रूप में तराशा जाना चाहिए। इसमें भी उच्च शिक्षा से जुड़े हुए प्रोफ़ेसर ही योगदान दे सकते हैं।  

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