होली मुबारक। दोगली सियासत करने वाले जनता से आदेश मांग रहे हैं। जनता चाहेगी तब सरकार बनाएंगे। जनता कहेगी तब चुनाव लड़ेंगे। क्या बेहूदगी है! लोकतंत्र में हाँथ नहीं उठाये जाते। यहाँ मतदान होता है। चुनाव जनता नहीं, राजनैतिक दल लड़ाते हैं। पहले सियासी मैदान में आओ फिर जनादेश का इंतज़ार करो। बार बार जनता को काहे को उल्लू बनाते हो भाई!
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