Tuesday, 27 December 2011

jativadi hai u.p. ki siyasat

"जातिवादी है यू पी की सियासत(जातीय समीकरण और यू पी चुनाव)"-
इस बार के यू पी विधानसभा चुनाव में कुछ भी कहना मुश्किल है. मुस्लिम मतों को दलीय मत के रूप में बदलने के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस में जबरदस्त रस्साकशी जारी है. आरक्षण का जिन्न बोतल से बाहर निकल चुका है. कांग्रेस के आरक्षण कार्ड से सपा और बसपा सदमे में है. उधर पीस पार्टी की मुस्लिम मतों के निचले तबके में गहरी पैठ है. अब तक के चुनावों में एकमुश्त पड़ने वाला माइनोरिटी वोट विखंडित है. ब्राह्मन मतदाता कन्फ्यूज हैं. ब्राह्मण मतदाताओं का एक मुश्त वोट किसी भी दल को नहीं मिलाने की संभावना है.उनकी बसपा से मोहभंग की स्थिति है.उच्च शिक्षा में पिछले पांच वर्षों में एक भी नौकरी सवर्णों को नहीं मिली है.  सपा के साथ ठाकुर मतदाता हैं. ठाकुर वर्ग के  मतदाताओं का कहना है जो बसपा को हराएगा उसी को वोट देंगे. कुर्मी मतदाता अपना दल के साथ सपा को भी वोट देंगे. जाटों पर  अजित सिंह की मजबूत पकड़ है. यादव जाति का समूह पूरी तरह मुलायम सिंह के साथ है. बेनी प्रसाद वर्मा की वजह से एक छोटे से इलाके का कुर्मी वोट कांग्रेस को मिल सकता है लेकिन ओ बी सी कोटे को काटने की वजह से पिछड़े वर्ग के मतदाता कांग्रेस से काफी नाराज हैं. इस बार के चुनाव में पिछड़े वर्ग के मतदाता समाजवादी पार्टी को एकमुश्त वोट दे सकते हैं. बी जे पी भी साइलेंट वोटिंग में बढ़त बना सकती है. फिलहाल आगे आगे देखिए होता है क्या!    
  

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