Thursday, 15 December 2011

annagiree

यार! यह कोई बात थोड़े ही होती है कि जब चाहा कहीं भी धरना दे दिया. अब अन्ना हैं कि इस बार सोनिया गांधी के घर पर धरना देने का ऐलान कर चुके हैं. अब सरकार ठहरी कमजोर! यदि टीम अन्ना में दम है तो मायावती जी के घर के सामने अनशन करके दिखाएँ....... प्रेशर ग्रुप का मतलब जबर्दस्ती थोड़े ही होती है. एक बात और जो गौरतलब रही; वह यह कि अन्ना ने एक दिन का सांकेतिक धरना दिल्ली में महाराष्ट्र भवन से ही क्यों शुरू किया? क्या यह स्वतंत्र भारत में मराठा राज्य की सर्वोच्चता का संकेत नहीं था. इतिहास गवाह रहा है कि मराठों ने देश के लिए कितना खून बहाया...........झूठ नहीं बोलूंगा! कानून बनाने में वक्त तो लगता ही है जैसे प्यार का पहला ख़त लिखने में वक्त लगता है. अन्ना और उनकी टीम तो देश की जनता को ऐसा सन्देश दे रही है कि मानो कांग्रेस ने अब तक देश के विकास के लिए कुछ किया ही नहीं. ऐसा नहीं है कि देश ने तरक्की नहीं की है. लोगों का जीवन स्तर उठा है.  पूर्व के "ब्यूरोक्रेट्स" को लेकर चले हैं भारत-भाग्यविधाता बनने! अन्ना खुद जबर्दस्त "ब्यूरोक्रेसी" और महत्वाकांक्षियों  की चपेट में हैं!   

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