गुरु-
पट्टू राम नाम का क्रान्ति पाठ पढ़ रहा था। क्रान्ति की ज्वाला धार्मिक, सांप्रदायिक और जातिवादी अवचेतन में गुरु के ह्रदय में धधक रही थी। गुरु दलित विमर्श में नए पट्टू राम गढ़ रहे थे जो जय भीम का सुग्गा पाठ पढ़ रहा था। गुरु प्रत्येक ब्राह्मण जाति को दलित मानसिकता से देखते थे। एक ओर पंडों का जोर दूसरी तरफ दलितों की तलवारें खिंची रहती थीं। पंडा बनारस से राम रटु राम रटु राम रटु जिह्वा का भोजपुरिया पाठ पढ़ कर आया था। विश्वविद्यालय में गुरु अपने पालतू तोताओं को राम रटु राम रटु का पाठ पढ़ाने के लिए छोड़ गए। वहां अब रीढ़ विहीन नस्लें जन्म ले रही हैं।
पट्टू राम नाम का क्रान्ति पाठ पढ़ रहा था। क्रान्ति की ज्वाला धार्मिक, सांप्रदायिक और जातिवादी अवचेतन में गुरु के ह्रदय में धधक रही थी। गुरु दलित विमर्श में नए पट्टू राम गढ़ रहे थे जो जय भीम का सुग्गा पाठ पढ़ रहा था। गुरु प्रत्येक ब्राह्मण जाति को दलित मानसिकता से देखते थे। एक ओर पंडों का जोर दूसरी तरफ दलितों की तलवारें खिंची रहती थीं। पंडा बनारस से राम रटु राम रटु राम रटु जिह्वा का भोजपुरिया पाठ पढ़ कर आया था। विश्वविद्यालय में गुरु अपने पालतू तोताओं को राम रटु राम रटु का पाठ पढ़ाने के लिए छोड़ गए। वहां अब रीढ़ विहीन नस्लें जन्म ले रही हैं।
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