साथियों! एक पोस्ट पर दुबारा- मैंने सभी प्रोफेसरों की बात न कहकर कुछ की बात की है। आप जे एन यू मत जाएँ। अपने विभाग में देखिये और खोजिये। सच बतलाइयेगा। यू पी एस सी को छोड़ कहीं भी चयन ज्ञान और तर्क आधारित नहीं होता है। ढूंढिए आप! ढूँढते रह जायेंगे। विश्वविद्यालयों में तो चयन का तरीका ही गलत है। जिस उच्चतर सेवा की बात आप कर रहे हैं वह महाविद्यालयों में शिक्षकों का चयन करता है न कि विश्वविद्यालयों में। सूत्र बतलाते हैं कि वहां भी प्रवक्ता के पद बिकते हैं और कुछ प्रोफ़ेसर साब लोग महज टी ए-डी ए और सम्बन्ध बनाकर एक दो चेलों को फिट करने जाते हैं। दूसरे विश्वविद्यालय में चयन का तरीका क्या है? आप मुझसे बेहतर जानते हैं। बतलाइये। कागजी नहीं प्रैक्टिकल वाला। उत्तर प्रदेश के विश्विद्यालयों के कई शिक्षक शोध छात्रों से घर की सब्जी तक ढुलवाते हैं। उत्तर प्रदेश में कई शिक्षक अधिकाँश शोध छात्रों को खूनी आसूं तक गिरवा लेते हैं। संयोग से दिल्ली में ऐसा नहीं है। लेकिन दिल्ली में जो है वह यहाँ नहीं हैं। सवाल यह है कि क्यों नहीं यू जी सी एक अध्यापक परीक्षा ले कर साक्षात्कार द्वारा शिक्षक चयन करता। नेट के बाद भी। गुरुवर बातें बहुत हैं। बातों का क्या? क्यों असिस्टैंट प्रोफ़ेसर से एसोसिएट प्रोफ़ेसर और प्रोफ़ेसर पद पर पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षाएं आयोजित नहीं की जातीं!
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