मनुष्यत्व बोध से मजबूत होंगी महिलायें-
नाजुक बनने से बेहतर है कि महिलायें बलिष्ठ शरीर बनाने का प्रयास करें। माशर्ल आर्ट, खेल कूद, दौड़ कसरत, सैनिक ट्रेनिंग बालिकाओं के विद्यालय में अनिवार्य कर दिया जाए। स्त्रियों को शरीर, बुद्धि और आर्थिक दिशा में समन्वित रूप से शक्तिशाली बनाने का प्रयास किया चाहिए। वीनस विलियम्स और सेरेना विलियम्स बहनों को देखिये तो सही। है किसी में दम कि उन जैसी लड़कियों के साथ कोई जबरिया कर दे। देंगी कनपटी पर घुमा के। बात यह है कि लड़कियों को स्त्री बोध से मुक्ति दिलवानी होगी। इसके साथ ही पुरुषों को भी पुरुषत्व अभिमान से मुक्त होना होगा। बलिष्ठ समाज की संकल्पना हेतु समाज में मनुष्यत्व बोध को जागृत करना होगा।
नाजुक बनने से बेहतर है कि महिलायें बलिष्ठ शरीर बनाने का प्रयास करें। माशर्ल आर्ट, खेल कूद, दौड़ कसरत, सैनिक ट्रेनिंग बालिकाओं के विद्यालय में अनिवार्य कर दिया जाए। स्त्रियों को शरीर, बुद्धि और आर्थिक दिशा में समन्वित रूप से शक्तिशाली बनाने का प्रयास किया चाहिए। वीनस विलियम्स और सेरेना विलियम्स बहनों को देखिये तो सही। है किसी में दम कि उन जैसी लड़कियों के साथ कोई जबरिया कर दे। देंगी कनपटी पर घुमा के। बात यह है कि लड़कियों को स्त्री बोध से मुक्ति दिलवानी होगी। इसके साथ ही पुरुषों को भी पुरुषत्व अभिमान से मुक्त होना होगा। बलिष्ठ समाज की संकल्पना हेतु समाज में मनुष्यत्व बोध को जागृत करना होगा।
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