Saturday, 31 August 2013

धर्म के मर्म को समझिए

धर्म के मर्म को समझिए-
मेरे ख़याल से देश का एक नागरिक पहले धार्मिक होता है  और तब देशभक्त। यदि देश की 95 प्रतिशत हिन्दू धर्म के अनुयायी पहले हिन्दू रहें और 95 प्रतिशत मुस्लिम अनिवार्य ढंग से मुस्लिम रहें तब कहीं विवाद है ही नहीं। दिक्कत यह है कि देश की 95 प्रतिशत आबादी न हिन्दू है और न मुसलमान। वह परिधानों में लिपटा हुआ चलता हुआ शव है। काश शिव बन पाते।  विवाद और उन्माद तब है जब धर्म का इस्तेमाल व्यक्ति,समूह और दल राजनीति के लिए करते हैं।  जब अनुयायियों का उद्देश्य सियासी दूकान चमकाकर सत्ता सुख हासिल करना हो जाए तब बेड़ा गर्क समझिये। धर्म कहीं भी तोड़ फोड़ की बात नहीं करता बल्कि भारत में सदियों से इंसानियत को बचाए रखने में वेद, पुराण, रामायण, गीता और कुरआन  ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।  

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