अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पहरा-
उत्तर प्रदेश के एक जिम्मेदार आला अफसर के एक फरमान के मुताबिक़ अब लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर किसी पर व्यक्तिगत प्रहार नहीं कर पाएंगे। इस तरह अब व्यक्तिगत बनाम सामूहिक का द्वन्द देखने को मिलेगा। प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक चीजें व्यक्तिगत ही होती हैं। राजनीति के अखाड़े के निर्वाचित विधायक अथवा सांसद सभी व्यक्ति हैं। साथियों! जब मुल्क की सरकारें सोशल नेटवर्किंग साइटों से दहशतज़दा हो जाएँ तब आप समझ लीजिए कि मुल्क की तकदीर बदलने वाली है! सवाल उठता है कि जिस पुलिस का गठन आम जनता के हित के लिए किया गया है उस पुलिस को सरकारें अपने हित के लिए ही हमेशा क्यों प्रयुक्त करती रही हैं ? क्यों लोकतंत्र में एक एक वोट पर भीड़ में पुलिसिया डंडे बरसाये जाते हैं ? और भी बहुत से सवाल।
सच बताऊँ-
लोकतांत्रिक पर्वों का मतलब
देश की आम जनता के एक हाथ में लड्डू है!
सिर पर दाल रोटी का बोझ
पैर- पीठ पर डंडा!
और गले में फांसी का फंदा!
एक भारतीय होने के नाते
प्रेम से बोलो
जय हिन्द
जय भारत
भारत माता की जय।
बापू अमर रहें!
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