Buddha Uvach
Wednesday, 7 August 2013
जिस लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को बार बार चुनौती दी जाती है उस देश की संप्रभुता भी बहुत दिनों तक सुरक्षित नहीं रहती।
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