Wednesday, 28 August 2013

तड़प रही है सोने की चिड़िया!
सोने की चिड़िया तड़प रही है। आज़ादी के बाद देश को अपनों ने ही लूटा है। ज़रा तलाश कीजिए अपने मुल्क को। दिखा कहीं देश।  नहीं न। इस समय देश  चीन, पाकिस्तान के साथ म्यांमार भी अपने देश में घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। लाचारगी की हालत में हैं हम।  देश विकल्पहीनता की स्थिति में है।  इस देश की सेना और जनता किंकर्तव्यविमूढ़ है।  दोनों देश के रहनुमाओं अर्थात नेताओं के भरोसे हैं।  हमारे देश के सोने को गिरवी रखने की तैयारी चल रही है।  सोने की कीमत पर खाद्य सुरक्षा की तैयारी  है। देश के भविष्य अर्थात बच्चे दिमागी बुखार से मर रहे हैं।  पूरी भारत सरकार चार्वाक दर्शन की अनुगामी बन चुकी है- यावत् जीवेत सुखं जीवेत, ऋणं कृत्वा घृतं पीवेत।  सौ में निन्यानबे बेईमान फिर भी भारत देश महान बना हुआ है । एक बात कहूं- "जब भारत गुलाम था तब अंग्रेज राष्ट्र भावना के तहत अपने देश को लूट रहे थे, उनकी लूट एक देश इंग्लैण्ड के हित के लिए थी लेकिन आज अपने ही बेटे भारत माता का चीर हरण कर रहे हैं। भारत के जय चंदों की लूट व्यक्तिगत भण्डार के लिए है।  सोना विदेश जाने की सुगबुगाहट से एक बार फिर सोने की चिड़िया तड़प रही है। चलिए हम सब मर्सिया गाने की तैयारी करते हैं!  

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