जरा पियक्कड़ों के दिल का दर्द सुनिए. शाम को मदिरा की दूकान पर बैठे पियक्कड़ जानते हैं कि अन्ना नहीं यह डान है. कितने कसीदे पढ़े गए थे कुछ दिन पहले ही अन्ना की शान में. अभी कुछ दिन ही तो हुए, मालूम पड़ रहा था कि "गांधी-टोप-युग" की वापसी हो गई. सारे पियक्कड़ों की नींद अब जाकर खुली जब कोड़े मारकर सरेआम पिटाई वाली बात सामने आयी. बंधु! गांधी टोपी के नीचे हिटलरी अंदाज है.वाह वाह क्या बात है? अच्छा; चलो मदिरा पीना बुरी बात है लेकिन यह क्या कि पियक्कड़ को पीटा जाये! अन्ना को नहीं मालूम कि आबकारी विभाग जब पैसा देता है तब देश के अधिकांश नौकरी पेशा वालों के घरों में चूल्हे जलते है. चलिए बोलिए तो मित्रों! सभी पियक्कड़ों की जै. हिटलर शाही नहीं चलेगी, नहीं चलेगी..........
No comments:
Post a Comment