जो प्रत्यक्ष है उसे माया कहते हैं.जागतिक चीजें ही विनष्ट होती हैं.जो अप्रत्यक्ष है वह अनुभूति का विषय है और अनुभूतियाँ कभी नष्ट नहीं होतीं! दूसरे यही बात तो इस्लाम धर्म के धार्मिक मतावलंबी कहते हैं कि आदम और हौव्वा की पूरी दुनिया संतान है.हिन्दू कहते हैं कि श्रद्धा और मनु के संतान हैं हम सब! अब देखिए! इसका मतलब साफ है कि शुरूआती दिनों में अन्तर्जातीय विवाह भी हुए होंगे क्योंकि सगे भाई बहन का आपस में विवाह संभव नहीं था. इसलिए बंधु! इस तरह कि उच्चता की बात करना एक विशेष जातीय और प्रजातीय दृष्टि है.कहीं न कहीं धार्मिक कहानियां गढ़ने वाले लोगों ने गड़बड़ी की है.
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