अमेरिका ने भारत की आपत्ति के बाद भारतीय मानचित्र को सुधार दिया है. बाकायदा भारत से माफी भी मांग ली है.लेकिन एक राग तो अलाप ही दिया है.अब देखिए! नवसाम्राज्यवादी ताकतें कौन सी शैतानी चाल चलती हैं.जो भारत को खंडित करना चाहते हैं उन्हें यह जानना और समझना चाहिए कि भारत के विषय में बहुत पहले ही वायु पुराण में लिखा है-
"उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणं.l
वर्षं तद्भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः l l " इसी के साथ ही विष्णु पुराण में भी लिखा है-
" गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे l
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात l l"यहाँ देवगणों का अभिप्राय सज्जनों से है.महान लोगों से है.
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