Sunday, 15 September 2013

धर्म और पाखण्ड के बीच बुनियादी फर्क है।  दुर्भाग्य से इन दिनों पाखण्ड को धर्म समझा जा रहा है।  धर्म व्यक्ति में आत्म बल पैदा करने वाला विधान है जबकि पाखण्ड कुवृत्तिपरक प्रदर्शन।    

Friday, 13 September 2013

हिन्दी दिवस-

हिन्दी दिवस-
सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिन्दी के शव दफ़न की तैयारी शुरू हो चुकी है।  उच्च नौकरशाही पर काबिज इंडियन हिन्दी से मीलों दूर होते जा रहे हैं। हिन्दी वाले हिन्दी हिन्दी चिल्लाकर मलाई काट रहे हैं। धीरे धीरे हिन्दी के शब्दों को अंग्रेजी के शब्दों द्वारा विस्थापित किया जा रहा है। सवाल सिर्फ हिन्दी को बचाने का ही नहीं है सवाल हिन्दी के साथ प्रत्येक भारतीय भाषाओं की अस्मिता को संरक्षित रखने का है।  जाहिर है यह काम सरकार का नहीं वरन एक अरब से अधिक भारतीय जन सैलाब का है।  

Tuesday, 10 September 2013

मनुष्य की सुन्दरतम कृति का नाम ईश्वर है। उसका विभत्सतम प्रदर्शन खून खराबा है।  असल में आगामी लोकसभा चुनाव को एक बार फिर सांप्रदायिक बनाने का रंग चढ़ने लगा है।  

Monday, 9 September 2013

मर रही है जनता-
रूपया जब टूट रहा था तब मुज्जफर नगर में दंगे की रूप रेखा तय हो रही थी।  जब देश की जनता महंगाई के कारण बिलख रही थी तब भावनाओं को भड़काया जा रहा था। अब भयावह परिणाम सबके सामने है।  जब सांसदों के हित का मसला होता है तब संसद में ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित होते हैं जब मुल्क की अवाम का मसला होता है तब संसद नहीं चलेगी।  समस्या यह है कि जनता चुने किसे।  बेवफाई कई जनप्रतिनिधियों की फितरत बन चुकी है चालबाज़ आशिक की तरह।    

Sunday, 8 September 2013

ऐसे हो उच्च शिक्षा में शिक्षक चयन- 
आचार्यों की प्रतिभा पर तनिक भी संदेह नहीं है। मसला विभाग में अयोग्य उत्तराधिकारियों के चयन का है। केन्द्रीय  विश्वविद्यालयों के लिए यूनियन पब्लिक एजुकेशन सर्विस का प्रावधान किया जाना चाहिए।  इसमें प्रशासनिक और शैक्षणिक अनुभागों का गठन कर विश्वविद्यालय के लिए क्रमशः प्रशासनिक अधिकारी मसलन रजिस्ट्रार इत्यादि और असिस्टैंट प्रोफ़ेसर इत्यादि को चयनित किया जाना चाहिए, ताकि आचार्यों  की मठाधीशी टूटे।     

Friday, 6 September 2013

साथियों! एक पोस्ट पर दुबारा-  मैंने सभी प्रोफेसरों की बात न कहकर कुछ की बात की है।  आप जे एन यू मत जाएँ।  अपने विभाग में देखिये और खोजिये। सच बतलाइयेगा। यू पी एस सी को छोड़ कहीं भी चयन ज्ञान और तर्क आधारित नहीं होता है।  ढूंढिए आप! ढूँढते रह जायेंगे। विश्वविद्यालयों में तो चयन का तरीका ही गलत है।  जिस उच्चतर सेवा की बात आप कर रहे हैं वह महाविद्यालयों में शिक्षकों का चयन करता है न कि विश्वविद्यालयों में। सूत्र बतलाते हैं कि वहां भी प्रवक्ता के पद बिकते हैं और कुछ  प्रोफ़ेसर साब लोग महज टी ए-डी ए और सम्बन्ध बनाकर एक दो चेलों को फिट करने जाते हैं। दूसरे विश्वविद्यालय में चयन का तरीका क्या है? आप मुझसे बेहतर जानते हैं। बतलाइये। कागजी नहीं प्रैक्टिकल वाला। उत्तर प्रदेश के विश्विद्यालयों के कई शिक्षक शोध छात्रों से घर की सब्जी तक ढुलवाते हैं। उत्तर प्रदेश में कई शिक्षक अधिकाँश शोध छात्रों को खूनी आसूं तक गिरवा लेते हैं।  संयोग से दिल्ली में ऐसा नहीं है। लेकिन दिल्ली में जो है वह यहाँ नहीं हैं।  सवाल यह है कि क्यों नहीं यू जी सी एक अध्यापक परीक्षा ले कर साक्षात्कार द्वारा शिक्षक चयन करता। नेट के बाद भी।  गुरुवर बातें बहुत हैं।  बातों का क्या? क्यों असिस्टैंट प्रोफ़ेसर से एसोसिएट प्रोफ़ेसर और प्रोफ़ेसर पद पर पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षाएं आयोजित नहीं की जातीं! 
सर! नाम न गिनवाइये। लेकिन इतना जरुर कहना चाहूँगा कि काश नामवर जी जैसा चयन अब के चयन समिति में शामिल प्रोफ़ेसर कर पाते! हिंदी का कोई प्रोफ़ेसर किसी प्रोफ़ेसर का दामाद है तो कोई किसी का बेटा। कोई किसी की बेटी तो कोई किसी की बीबी। मामला आपसी अनैतिक खरीद फ़रोख्त का है। सब लगे बझे हैं। किसने अधिकार दिया आप को कि आप आने वाली नस्लों को रीढ़ विहीन बना डालें। दुर्भाग्य से देश के अधिकाँश विश्वविद्यालय उपाधियाँ वितरित करने वाली फैक्ट्री के रूप में तब्दील हो चुके हैं।  यह भी हकीकत है कि दुनिया के २०० विश्वविद्यालयों में आप और हम कहीं भी नहीं हैं।   

Thursday, 5 September 2013

शिक्षक और पंडा-
फेस बुक पर जब फर्जी क्रांतिकारियों को देखता हूँ तब उन पर तरस आती है। खासकर कुछ  प्रोफेसरों को जिनकी औकात विश्वविद्यालय और सम्बद्ध कालेजों में शिक्षक चयन के मुद्दे पर एक कठपुतली भर से अधिक कुछ नहीं होती। इस तरह के कई क्रांतिकारी हैं जिन्हें सिर्फ क्रांति जगत का पंडा  भर कहा जा सकता है।  वही बनारसी पंडों की तरह।  

Wednesday, 4 September 2013

आदरणीय शिक्षकों को प्रणाम-


आदरणीय शिक्षकों को प्रणाम-
आज शिक्षक दिवस है। आज का दिन महान शिक्षक राधा कृष्णन का जन्म दिवस है।  महान शिक्षक वे होते हैं जो अपनी प्रतिभा को विद्यार्थियों में अंकुरित कर दें।  कोई जरुरी नहीं कि कक्षा में पढ़ने और पढ़ाने के दौरान ही गुरु शिष्य का रागात्मक प्रेम पुष्पित-पल्लवित हो।  जिन शिक्षकों से शिक्षा मिली उनमें प्रो पुरुषोत्तम अग्रवाल सर की शिक्षण शैली अद्भुत रही। डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी सर के घर पर साहित्यिक संस्कार मिला। डॉ वेद प्रकाश सर से मित्रवत गुरु शिष्य सम्बन्ध बना। डॉ आशुतोष कुमार सर से कोई विद्यार्थियों की मदद करना सीख सकता है। फेस बुक पर आदरणीय मोहन श्रोत्रिय सर से मुलाक़ात हुई।  पत्रकारिता की बारीकियों को अग्रज अम्बरीश कुमार सर ने खबर लिखने के दौरान बतलाया। सभी को प्रणाम।    

Tuesday, 3 September 2013

मनुष्यत्व बोध से मजबूत होंगी महिलायें

मनुष्यत्व बोध से मजबूत होंगी महिलायें-
नाजुक बनने से बेहतर है कि महिलायें बलिष्ठ शरीर बनाने का प्रयास करें। माशर्ल आर्ट, खेल कूद, दौड़ कसरत, सैनिक ट्रेनिंग बालिकाओं के विद्यालय में अनिवार्य कर दिया जाए।  स्त्रियों को शरीर, बुद्धि और आर्थिक दिशा में समन्वित रूप से शक्तिशाली बनाने का प्रयास किया  चाहिए। वीनस विलियम्स और सेरेना विलियम्स बहनों को देखिये तो सही। है किसी में दम कि उन जैसी लड़कियों के साथ कोई जबरिया कर दे।  देंगी कनपटी पर घुमा के।  बात यह है कि लड़कियों को स्त्री बोध से मुक्ति दिलवानी होगी। इसके साथ ही पुरुषों को भी पुरुषत्व अभिमान से मुक्त होना होगा। बलिष्ठ समाज की संकल्पना हेतु समाज में मनुष्यत्व बोध को जागृत करना होगा। 

Monday, 2 September 2013

सर्वहारा का अस्तित्व खतरे में है

सर्वहारा का अस्तित्व खतरे में है-
इन दिनों चमचमाती कारों, आलीशान मकानों और अभिजात्यवर्गीय पहनावों में क्रान्ति की ज्वाला धधक रही है। प्रत्येक अभिजात्यवर्गीय इंसान सर्वहारा की लड़ाई लड़ने को व्यग्र है।  सर्वहारा का अस्तित्व साहित्य में बिकाऊ माल के अलावा कुछ भी नहीं, वह पुरस्कार पाने के लिए साहित्यकारों को पुख्ता जमीन मुहैया कराता है।    

Sunday, 1 September 2013

गुरु-
पट्टू राम नाम का क्रान्ति पाठ पढ़ रहा था।  क्रान्ति की ज्वाला धार्मिक, सांप्रदायिक और जातिवादी अवचेतन में गुरु के ह्रदय में धधक रही थी।  गुरु दलित विमर्श में नए पट्टू राम गढ़ रहे थे जो जय भीम का सुग्गा पाठ पढ़ रहा था।  गुरु प्रत्येक ब्राह्मण जाति को सशंकित मानसिकता के साथ देखते थे। उन्हें प्रत्येक चाणक्य वंशीय चन्द्रगुप्त कुलीन नजर आता था जैसे कि वह नन्द वंश का नाश करने के लिए पढ़ रहा हो। एक ओर पंडों का जोर दूसरी तरफ दलितों की तलवारें खिंची रहती थीं।  पंडा बनारस से राम रटु राम रटु राम रटु जिह्वा का भोजपुरिया पाठ पढ़ कर आया था। विश्वविद्यालय  में गुरु अपने पालतू तोताओं को राम रटु राम रटु का पाठ पढ़ाने के लिए छोड़ गए। सुना है "वहां" अब रीढ़ विहीन नस्लें जन्म ले रही हैं।  
गुरु-
पट्टू राम नाम का क्रान्ति पाठ पढ़ रहा था।  क्रान्ति की ज्वाला धार्मिक, सांप्रदायिक और जातिवादी अवचेतन में गुरु के ह्रदय में धधक रही थी।  गुरु दलित विमर्श में नए पट्टू राम गढ़ रहे थे जो जय भीम का सुग्गा पाठ पढ़ रहा था।  गुरु प्रत्येक ब्राह्मण जाति को दलित मानसिकता से देखते थे। एक ओर पंडों का जोर दूसरी तरफ दलितों की तलवारें खिंची रहती थीं।  पंडा बनारस से राम रटु राम रटु राम रटु जिह्वा का भोजपुरिया पाठ पढ़ कर आया था। विश्वविद्यालय  में गुरु अपने पालतू तोताओं को राम रटु राम रटु का पाठ पढ़ाने के लिए छोड़ गए। वहां अब रीढ़ विहीन नस्लें जन्म ले रही हैं।