आज के राज में निति का अभाव है. राज की कोई निति नहीं है. प्रतिदिन दलबदल प्रभावी है. सत्ता संघर्ष के लिए इतना घमासान पहले कभी नहीं दिखलाई पड़ा. पहले राज का धर्म होता था.अब धर्म सत्ता प्राप्ति का माध्यम बन चुका है.राम के नाम पर सरकारें बनाने वाले लोगों का पर्दाफाश हो चुका है. धीरे धीरे जातिविहीन लोकनीति का बोलबाला होगा. विकास की नीति प्रभावी होगी.
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