बुद्ध जानते हैं: भ्रष्टाचार सामाजिक बीमारी के रूप में पनप चुका है. इससे मुक्ति के लिए किसी अन्ना की जरुरत नहीं है बल्कि मुल्क के लोगों को खुद सचेत होना होगा.वे यह भी जानते हैं कि गाँधी जी का भरापूरा परिवार था . उन्हें घर काखर्चा चलाना पड़ता था.वे कभी हार मानने वालों में से न थे.अपनेसाथ चलने वालों वालों के बल पर उन्होंने जनांदोलन खड़ा किया था.वे अथक थे.उनका प्रतिरोध अंग्रेजी साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ़ था.उस समय का जनसंघर्ष स्वतः उद्भूत था .एक पवित्रता की सियासत मुल्क में हिलकोरें ले रही थी.बन्दूकबल पर अहिंसात्मक चुनौती भारी पड़ गई थी.सत्ता बनाम सियासत में सत्य और अहिसा कि सियासत भरी पड़ गई थी.बुद्ध यह भी जानते हैं कि करुणा का भाव बाद में चलकर हिन्दुओं ने बौद्धों से ही लिया.पूरी दुनिया में धार्मिक वितंडावाद और राजतंत्र के खिलाफ़ न तो बुद्ध जैसा सशक्त स्वर मुखरित होता है और न ही गाँधी जी जैसा सशक्त अभियान इतिहास के पृष्ठों में दर्ज़ है.करुणा, दया ,सत्य एवंअहिंसात्मक रास्ते को शत शत नमन! बुद्ध की कामना है कि इतिहास के पृष्ठों में उपनिवेशवाद,नव उपनिवेशवाद,साम्राज्यवाद और नवसाम्राज्यवाद के खिलाफ़ सशक्त प्रतिरोध अहिंसात्मक ढंग से पनपे. बुद्ध यह भी जानते हैं कि सत्ता बंदूकों और जिद के दबाव से नहीं बल्कि अहिंसात्मक जनांदोलनों के बल पर हासिल कि जाती है.जय हो आदिकालीन एवं पारंपरिक लोकतंत्र की जय हो!
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