साहित्य किसानों,मजदूरों और गरीब गुर्बों के हितों से निकलकर मध्यवर्ग की अभिरुचियों के अनुसार परिवर्तित हो रहा है. साहित्य में अब प्रेम के नाम पर सेक्स बिक रहा है. यह भी ठीक है कि साहित्य का एक उद्देश्य मॉल कल्चर में प्रवेश करते हुए; साहित्य के भी बिग बाज़ार की तलाश करना है.दरअसल बाज़ार की जरूरतों केमुताबिक साहित्य उत्पादित किया जा रहा है ताकि विमर्शकार विमर्श और बयां जारी करें.
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