लौटता मैं जब पाठशाला से घर, अपने हाथों से खाना खिलाती थी माँ.....आज न तो अम्मा हैं और न ही इसे गाकर अक्सर रुलाने वाले ग़ज़ल सम्राट जगजीत बाबू.निदिया उन्हें भी सुला गई.अब तो अम्मा के साथ उनकी भी यादें ही स्मृति शेष रह गई हैं.जाने चले जाते हैं कहाँ दुनिया में आने वाले, जाने चले जाते हैं कहाँ.....l
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