दिल्ली ब्यूरोक्रेसी की दोहरी मार झेलेगी-
दिल्ली दिलवालों की न होकर उच्च नौकर शाहों की बन चुकी है। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह साहब पूर्व में उच्च नौकरशाही के अंग रह चुके हैं। अब पूर्व में उच्च नौकरशाही से ताल्लुक रखने वाले अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं। उनकी पत्नी अभी भी उच्च नौकरशाही की अंग हैं। दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाला आम आदमी एक बार फिर छला गया। दोबारा चुनाव चुनाव हुए तो इसकी सजा आम आदमी ही भुगतेगा। दिल्ली की जनता ने यदि मिला जुला जनादेश दिया है तो सरकार भी मिली जुली ही बननी चाहिए। असल में जनादेश के विरुद्ध सरकार न बनने देना भी आप की तानाशाही की प्रवृत्ति को प्रदर्शित करती है। यदि आप यह कहते हैं कि दिल्ली में मोदी का जादू नहीं चला तो आप गलत हैं क्योंकि मोदी न होते तो आज आम आदमी पार्टी के भ्रम जाल में फंसकर जनता उन्हें 40 से 45 सीटों पर विजयी बना देती। वैसे आज़ाद भारत में अभिजात्यों ने हमेशा आम आदमी को छला है।
दिल्ली दिलवालों की न होकर उच्च नौकर शाहों की बन चुकी है। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह साहब पूर्व में उच्च नौकरशाही के अंग रह चुके हैं। अब पूर्व में उच्च नौकरशाही से ताल्लुक रखने वाले अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं। उनकी पत्नी अभी भी उच्च नौकरशाही की अंग हैं। दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाला आम आदमी एक बार फिर छला गया। दोबारा चुनाव चुनाव हुए तो इसकी सजा आम आदमी ही भुगतेगा। दिल्ली की जनता ने यदि मिला जुला जनादेश दिया है तो सरकार भी मिली जुली ही बननी चाहिए। असल में जनादेश के विरुद्ध सरकार न बनने देना भी आप की तानाशाही की प्रवृत्ति को प्रदर्शित करती है। यदि आप यह कहते हैं कि दिल्ली में मोदी का जादू नहीं चला तो आप गलत हैं क्योंकि मोदी न होते तो आज आम आदमी पार्टी के भ्रम जाल में फंसकर जनता उन्हें 40 से 45 सीटों पर विजयी बना देती। वैसे आज़ाद भारत में अभिजात्यों ने हमेशा आम आदमी को छला है।
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