Friday, 27 December 2013

चाटुकार भले ही समकालीनों में सत्ता का विदूषक होता हो लेकिन सर्वाधिक षड्यंत्र भी वही करता है। दुर्भाग्य से भारतीय लोकतांत्रिक संस्करण ऐसे तमाम ऐतिहासिक तथ्यों से अटा पड़ा है। अफसोस बस इतना कि हम इतिहास से सीख नहीं लेते।    

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