चाटुकारिता भी हद दर्जे की कला है। जो जितना बड़ा चाटुकार, वह उतना ही बड़ा साहित्यकार, पत्रकार, कला मर्मज्ञ, जनसेवक, समाजसेवक और न जाने क्या क्या है। भदेस भाषा में चाटुकारों को तेलू के नाम से नवाजा जाता है। दुर्भाग्य से इतिहास भी तेलू का, तेलू द्वारा और तेल मारने के लिए लिखा जाने वाला एक दस्तावेज मात्र है।
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