आप सरकार बनाएगी। मतलब सादगी में सरकार बनेगी। सादगी में सत्ता सुख और भी अधिक उन्मादकारी होता है। सवाल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नौकरशाही से मुक्ति दिलाने का है। जितना गम्भीर सवाल राजनीति के अपराधीकरण रोकने का है उतना ही गम्भीर सवाल सियासत के नौकरशाही मुक्त होने का भी है। अपराधी और उच्च नौकरशाह के रूप में सत्ता सुख भोग चुके लोग भी राजनीति के लिए आतुर हैं। दोनों के पास नंबर दो का पैसा है।भारतीय राजनीति नंबर दो के पैसे को नंबर एक में रूपांतरित करती है।
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