किसान की हालत खराब है-
छोटी जोत के किसानों का घर भर पूरे दिन सिर पर बोझा ढोता है. तंगहाल और बदहाल किसान अपनी किस्मत पर एवं पूंजीपतियों की साजिश के कारण खून के आंसू बहाने के लिए बाध्य हैं. साजिशन किसानों द्वारा पैदा किए हुए अनाज को पूंजीपति संगठित होकर कम मूल्य पर खरीदते हैं. बेचारे किसान कम मूल्य पर अनाज बेच देते हैं. अब तो किसानों के खेत में से अनाज सीधे मुनाफाखोरों की गोदामों में डंप हो जाता है. किसानों से 8 से 9 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से अनाज खरीदकर आंटे के रूप में 15 से 16 प्रतिकिलोग्राम की दर से ये पूंजीपति राशन बेचते हैं. जय हो बीमार;.........भारत की जय हो!
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