भारतीय बजट-
बीते हुए कल की तारीख़ में जब बजट पेश करते हुए आम आदमी की जेब पर डाका डालने की तैयारी की जा रही थी तब सचिन तेंदुलकर शतकों के शतक की तरफ बढ़ रहे थे. दोनों घटनाएँ कारपोरेट जगत की उत्पाद थीं. यह शतक बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा प्रायोजित भी हो सकता है. गलाकाट बजट की तरफ से ध्यान भंग करने के लिए यह दुर्घटना घटी. अब और मनोयोगपूर्वक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों को विज्ञापित कर सकेंगे सचिन. सचिन के शतकों के शतक लगाने से किसानों की खाद-सिंचाई और आम आदमी के घरों में चूल्हा जलने की समस्या हल तो हो नहीं जाएगी! यूरिया और
पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत को बढ़ाने की तैयारी है प्रधानमंत्री जी की. कारपोरेटघरानों की उँगलियों पर नाचते हुए बजट के निहितार्थ गरीब, मजदूर और छोटी जोत के किसानों की हत्याका सरकारी प्रयास है.
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