Monday, 16 April 2012

bharateey vaamapanth

भारत में वामपंथ-
हम समझते हैं कि जन जन में व्याप्त ईश्वरीय आस्था और विश्वास को चुनौती देकर हम भारत में वामपंथ को मजबूत कर सकते हैं.ऐसा कदापि संभव नहीं है. आप को उत्तर भारत के उन किसानों और मजदूरों के  बीच काम करना है जिनके जुबाँ पर राम और कृष्ण की कहानियाँ सर्वथा रहती हैं. जिनके माता-पिता ने अपने माता, पिता  और गुरु का पैर छूया है. भारतीय परिवेश में मार्क्सवादियों को चाहिए कि वे धार्मिक मुदद्दों पर बोलने की बजाय सामाजार्थिक वर्गीय निर्धारण पर बोलें. बात ज्यादा बनती नजर आएगी. दरअसल भारतीय वाम पंथ के साथ समस्या यही है कि वह पहले भगवान को गाली गलौज देता है. अब इसने फैशन का स्वरुप ग्रहण कर लिया है. ईश्वरीय सत्ता को फैशन स्वरुप गरियाने वाले कितने वामपंथी, किसानों और मजदूरों की सहायता के लिए गाँव की तरफ मुखातिब होते हैं! आप सोचिए जिस देश की किसानी प्रकृति अर्थात ( गाँव की भाषा में भगवान ) के भरोसे चलती हो. जहां की फसलें बाढ़ और सूखे की भेंट चढ़ जाती हों, वहां भला इस देश का किसान ईश्वरीय चेतना से कैसे विमुक्त हो सकता है? आप को संशोधित स्वरुप में किसानों और मजदूरों के बीच जाना ही होगा!

No comments:

Post a Comment