Tuesday, 17 April 2012

mata pita saty hain-

कुछ तो है-
वप से बना है 'बाप' अर्थात बीजवपन करने वाला मतलब पिता. दुनिया में बाप अथवा पिता का  होना अथवा न होना जितना सच है उतना ही सच ईश्वर का होना या न होना भी है. दुनिया में बहुत सी चीजें हम सिर्फ महसूस ही कर सकते है. हम ईश्वर को नहीं देख पाते लेकिन प्रत्येक अच्छाई और बुराई को खुद के साथ घटित होता हुआ महसूस करते हैं. हमारे भीतर देवत्व की कल्पना मन के सुन्दरतम पुरुष छवि की होती है और देवी की कल्पना को माँ के रूप में मूर्त पाते है. तो यह मान लिया जाना चाहिए कि हम अपने विश्वास और आस्थाओं को सुन्दरतम प्रतिरूप में गढ़ते ही हैं.   

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