सवाल लोकतंत्र में परिवर्तन का है-
भारतीय राजनीति की अंतरात्मा को परिवर्तित करने के लिए देश के नागरिकों को स्वयं का चरित्र भी परिवर्तित करना होगा। वेद सर! बात चीत में तल्ख़ होते हुए कहते हैं कि गुजरात को मोदी ने नहीं बल्कि गुजरात के निवासियों ने बनाया है। वहां की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ऐसी है कि वहां विकास हुआ और होगा। इसके बरक्स दिल्ली और यू पी में क्या है? एक सवाल जो अहम है उसे वे रखते हैं। यू पी में गुंडे और मवाली सड़क पर लड़कियों और समाज के साथ बदसलूकी करते हैं तब क्यों वहां पर आस पास खड़े लोग प्रतिरोध नहीं करते। आशुतोष सर और वन्दना भाभी जी ने संघर्षों के दिन में मेरी बहुत मदद की है। वेद सर तो मेरे अध्यापक ही रहे हैं। वे अध्यापक के रूप में सख्त लेकिन आदमी के रूप में बेहतर इंसान हैं। ऐन वक्त पर वे गंभीर रूप से चेताते हैं। एक दिन राजनीति करने वालों पर मैंने एक तल्ख़ टिप्पणी की थी। वहां शब्द अमर्यादित थे। लेकिन समाज की हर औरत देवी क्या मनुष्य भी नहीं होती। मैंने परिवार परामर्श केंद्र में परामर्श देते हुए देखा है कि अतिरिक्त वैवाहिक संबंधों की वजह से परिवार टूट रहे हैं। देख रहा हूँ हर चुनावों के बाद जनता छली जाती है। आखिर हम कहाँ जाएँ ? किसको वोट दें? हमें जन्नत की हकीकत मालूम है! सियासत में हुकूमत के चेहरे बदलेंगे लेकिन चरित्र वही रहेगा! इतिहास वही है। Wednesday, 30 April 2014
Tuesday, 29 April 2014
सभी मित्रों से एक सवाल-
जिस राज में महत्वपूर्ण ओहदों पर जाति विशेष के लोगों की तैनाती हो। जिस राज में जाति विशेष का आदमी सिविल सेवाओं अथवा लोक सेवाओं की भर्ती बोर्ड का अध्यक्ष बन जाता हो। जिस राज में भर्तियां फ़ार्म भरने के तीन से पांच साल बाद होती हों। जिस राज में बिजली का २४ घंटा रहना अचम्भे की बात हो। जिस राज में रात में चलने का मतलब जान जोखिम में डालना हो। जिस राज में हर महीने डीजल की कीमत 50 पैसे बढ़ जाती हो। जिस राज में चपरासी से लेकर अधिकारी तक की नियुक्तियों में रिश्वतखोरी चरम पर हो। जिस राज में किसान आन्दोलनों को जन्म ही न लेने दिया गया हो। जिस राज में मजदूरों को मनरेगा के माध्यम से रिश्वतखोर बना दिया गया हो। जिस राज में स्नातक होते होते लड़का बुजुर्ग की श्रेणी में गिना जाने लगे। वही मतलब चार साला ग्रैजुएशन हो गया हो। इन ढेर सारे मसलों पर जनवादी अग्रज, मार्क्सवादी गुरुजन, खांटी कम्युनिस्ट, समाजवादी चिंतक और दिशा निर्धारक विद्वतजन यदि चुप्पी साधे हुए हैं तो उन्हें अपनी चुप्पी तोड़नी ही चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि मोह पाश से मुक्त होकर योग्यता और दक्षता के आधार पर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां कब होंगी ? कब देश में वास्तविक जनतंत्र आएगा। Monday, 28 April 2014
Thursday, 24 April 2014
जब काम सिर चढ़कर बोलता है-
जब काम सिर चढ़कर बोलता है-
बुद्धिवादियों! की बकैती भी अजब है। लोग देख रहे थे कि घरों में से लोग मोदी की एक झलक पाने को बेताब थे। इस पर भी बार बार यह कह कर मन को दिलासा दे रहे हैं कि भीड़ बाहर वाली थी। जो भी हो। इतना तो तय है कि मोदी के साथ भारतीय जनता थी। विदेशी नहीं। भारतीय वोटर अपने अपने लोकसभा क्षेत्रों में भारतीय राजनीति का तख्ता पलट कर रहे हैं? फिर टेंशन काहे की बंधु ! दिल को खुश रखने का यह ख़याल अच्छा है।
Wednesday, 23 April 2014
मित्रों! इतिहास सृजन में अवदान सुनिश्चित करें-
मित्रों! इतिहास सृजन में अवदान सुनिश्चित करें-
सदन में शक्ति परीक्षण के दौरान देश की संसद अंतरात्मा के आधार पर वोट करने की अपील करती है। मुल्क की अवाम से एक अपील- साथियों! दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का इतिहास रचा जा रहा है। आप जाति, धर्म, सम्प्रदाय, उन्माद, पूर्वाग्रह, क्षेत्रवाद और अन्यान्य दुराग्रहों से ऊपर उठकर अपनी अंतरात्मा के आधार पर विकास और सद्भावना के नाम पर वोट कीजिए। मतदेय स्थल तक अवश्य जाएँ और अपने अमूल्य मत का प्रयोग करें। भारत माता की जननी, बेटी और भगिनी भी अपने अमूल्य मताधिकार का प्रयोग करें। आप उत्पीड़ित हैं। …आप मताधिकार का प्रयोग करके ही अपनी अस्मिता सुरक्षित रख सकती है.. मातृ शक्ति की जय हो राष्ट्र शक्ति की जय हो! Wednesday, 16 April 2014
स्वर्णिम इतिहास सृजन के लिए मतदान अवश्य करें-
लोकतंत्र विमर्शों के धरातल पर नहीं अपितु जनता की सदिच्छा पर जमीनी सच्चाई को उजागिर करती है। सत्ता तंत्र की लूट से समस्त भारतीय जनता कराहती रही है। २० वीं सड़ी के भ्रष्टाचार ने करोड़ो भारतीय जनता को प्रभावित किया है। जिम्मेदार ओहदेदारों द्वारा अमीर और गरीब के बीच बहुत गहरी खाई खोद दी गई है। इस देश की ७५ प्रतिशत आबादी के पास काम नहीं है। युवाओं के हाथ गरीबी से तंग हैं। अपने सपनों के भारत निर्माण के लिए अपने वोट को सोच समझकर पोल कीजिये। ध्यान रखिये आप को हर हालत में बूथों तक जाना है ताकि देश का स्वर्णिम इतिहास लिखा जा सके। ध्यान दीजिये भारतीय होने के कारण ही आप को मतदान का अधिकार है।
लोकतंत्र विमर्शों के धरातल पर नहीं अपितु जनता की सदिच्छा पर जमीनी सच्चाई को उजागिर करती है। सत्ता तंत्र की लूट से समस्त भारतीय जनता कराहती रही है। २० वीं सड़ी के भ्रष्टाचार ने करोड़ो भारतीय जनता को प्रभावित किया है। जिम्मेदार ओहदेदारों द्वारा अमीर और गरीब के बीच बहुत गहरी खाई खोद दी गई है। इस देश की ७५ प्रतिशत आबादी के पास काम नहीं है। युवाओं के हाथ गरीबी से तंग हैं। अपने सपनों के भारत निर्माण के लिए अपने वोट को सोच समझकर पोल कीजिये। ध्यान रखिये आप को हर हालत में बूथों तक जाना है ताकि देश का स्वर्णिम इतिहास लिखा जा सके। ध्यान दीजिये भारतीय होने के कारण ही आप को मतदान का अधिकार है।
Monday, 14 April 2014
सवाल दर सवाल-
भारत का नागरिक होने के नाते मुझे मत देने और मतदान करने का अधिकार है। विलुप्त हो रही प्रशासनिक दक्षता के बीच मोदी ने अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया है। मैं न तो आर एस एस का हूँ और न ही बी जे पी अथवा किसी अन्य सियासी दल का, लेकिन एक बात जो देखता हूँ उसे साफगोई से कहने में कोई गुरेज भी नहीं है। मोदी में विकासात्मक प्रतिबद्धता, राजनैतिक चातुर्य और संकल्पित राजधर्म है। हिन्दुस्तान के एक हज़ार वर्षों के इतिहास में हिन्दू उत्पीड़न की ढेर सारी घटनाएँ हैं जबकि इस्लामिक उत्पीड़न की महज एक घटना जो हादसा थी। यह जो इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतें हैं, उनसे सिर्फ एक सवाल कि मोदी ने गुजरात का विकास धर्म के आधार पर किया? क्या गुजरात की तरक्की से मुसलमानों का लाभ नहीं हुआ ? क्या मुजफ्फर नगर के दंगे के लिए भी मोदी ही जिम्मेदार हैं? क्या आतंकवादियों को इस लिए छोड़ दिया जाना चाहिए कि वे इस्लाम धर्म के मानने वाले हैं ? मोदी के अलावा देश की अथवा उसके राज्यों को सरकारों को न्यायपालिका क्यों संचालित कर रही हैं? मोदी के अलावा देश का कोई नेता भारत माता की जय क्यों नहीं बोलता ? देश की सरकारें इस्लामिक तुष्टीकरण में क्यों जुटी हैं ? इस देश की मेधा शक्ति विदेश जाने को क्यों मजबूर है? क्यों देश के विश्वविद्यालयों में ईमानदारी से शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं होती? इस देश की शिक्षा व्यवस्था क्यों बेरोजगारों को पैदा करती है? इसीलिए हमारी निगाह मोदी पर ठिठकती है कि देश के समक्ष ढेर सारी चुनौतियों से वे आम जनता को निजात दिला सकते हैं ? Sunday, 13 April 2014
प्रशासनिक दक्षता और मोदी-
संकल्पित राजधर्म गुंडई, आतंकवाद के साथ अलोकतांत्रिक आचरण और मर्यादाओं पर अंकुश लगाती है। मोदी का विरोध करने वालों से एक सवाल- मुसलमानों के खिलाफ मोदी ने कभी कुछ बोला?,,,,,,,रही बात गुजरात दंगों की तो उसमें सभी कौमों के लोगों की मौत हुई थी। लेकिन तथ्य यह भी है कि भारत के एक हजार वर्षों के इतिहास में धार्मिक उन्माद के नाम पर मुसलमानों पर पहली बार हमला हुआ था। ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि सिकंदर लोदी से लेकर औरंगजेब तक के शासनकाल में जेहाद के नाम पर हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ था। भारतीय इतिहास में धार्मिक रूपांतरण की न जाने कितने ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं। Friday, 11 April 2014
तो विकसित होगा देश और दुरुस्त होगी संसद-
इस बार अपराधियों ,गुंडों की खैर नहीं है। जनता बिकने को भी नहीं तैयार है। जातिवाद का नारा न तो यू पी और न ही बिहार में काम कर रहा है। पिछड़े वर्ग के मतदाता कहते हैं कि इस बार लोकसभा चुनावों में मोदी और अगली बार विधानसभा में मुलायम। दलित बिरादरी के मतदाताओं में भी कमोबेश यही राय है इस बार मोदी और विधानसभा चुनावों में मायावती। यही हालत बिहार में भी है.…इस बार मोदी और विधानसभा में नितीश। खैर ……इतना जरूर है कि 25 वर्षों बाद देश की संसद विकास के नारों पर गठित होने जा रही है। 1989 के चुनावों के बाद देश के आम चुनाव मंडल, कमंडल, जातिवाद और सम्प्रदायवाद पर लड़े गए.……। इस बार वोट विकास की भूख, नौजवानों को रोजगार, किसान को खाद-पानी, बिगड़ी हुई क़ानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर पड़ रहे हैं। आम जनता सब समझ रही है।
पारसमणि मोदी की जादुई छड़ी-
मोदी के आँखों में विकास की भूख है। बिना सत्तानशीं हुए विकास की चौखट नहीं लांघी जा सकती। जनता इस समय स्वयं को स्वर्ण बनाने पारसमणि "मोदी" पर टकटकी लगाये बैठी है। हताश, निराश और पराजित आम जन मानस को मोदी को वोट देने के अलावा दूसरा रास्ता भी नहीं बचा है! ऐसा मैं नहीं देश की जनता कहती है।
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