साथियों! आप सोचते हैं कि आप के लोकसभा चुनाव लड़ने से बी जे पी को नुकसान होगा! सवाल यह है कि आप के कितने विधायक 500 से अधिक मतों से चुनाव जीते हैं? लोकसभा चुनावों में हार जीत का अंतर हजारों वोटों के करीब होता है। फिर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और पंजाब की सियासत में अगड़ा, पिछड़ा, हिन्दू, मुसलमान, आरक्षण और गैर आरक्षण के आधार पर ही वोटिंग होती है। इसका क्या होगा? मायावती के एक भी दलित मतदाता कम नहीं हुए हैं। मुसलमान तीन खेमों में वोट देंगे। पहला बड़ा खेमा कांग्रेस के साथ खड़ा होगा। सपा के मुस्लिम प्रत्याशियों को मुसलमानों का वोट मिलेगा। बसपा के भी मुस्लिम उम्मीदवारों को मुस्लिम मतदाताओं का वोट मिलेगा। इस तरह दलित मतदाताओं का वोट पाकर बसपा भी २० से ३० सीटों पर चुनाव जीत जायेगी। बिहार में भी नितीश पर मुसलमान कितना भरोसा करेंगे, यह आने वाला वक्त ही बतलायेगा। यदि मुस्लिम बिरादरी के मतदाता बिखरे तो इसका सीधा फ़ायदा बी जे पी को होने जा रहा है।
Tuesday, 31 December 2013
Friday, 27 December 2013
आप सरकार बनाएगी। मतलब सादगी में सरकार बनेगी। सादगी में सत्ता सुख और भी अधिक उन्मादकारी होता है। सवाल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नौकरशाही से मुक्ति दिलाने का है। जितना गम्भीर सवाल राजनीति के अपराधीकरण रोकने का है उतना ही गम्भीर सवाल सियासत के नौकरशाही मुक्त होने का भी है। अपराधी और उच्च नौकरशाह के रूप में सत्ता सुख भोग चुके लोग भी राजनीति के लिए आतुर हैं। दोनों के पास नंबर दो का पैसा है।भारतीय राजनीति नंबर दो के पैसे को नंबर एक में रूपांतरित करती है।
सुलगते सवाल-
क्या चाटुकारों को प्रबुद्धजन की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है? चाटुकारों से समाज का कौन सा हित सम्भव है? इसके अलावा उनका कितना दोष है जो ज्ञानी-विज्ञानी होते हुए भी चाटुकारों को ही तरजीह देते हैं? क्या तेल खाने और खिलाने वाले से समाज का पतन नहीं होता? सामाजिक-सांस्कृतिकशुचिता प्रभावित नहीं होती? भारतीय विश्ववविद्यालयों में अधिकाँश वी सी चाटुकार और सत्ता के दलाल ही नहीं काबिज़ हैं? क्या देश के अधिकाँश विश्वविद्यालयों के डीन और विभागाध्यक्ष कुलपति चमचई नहीं करते?
Wednesday, 25 December 2013
इधर भी नजर करें-
चाटुकारिता भी हद दर्जे की कला है। जो जितना बड़ा चाटुकार, वह उतना ही बड़ा साहित्यकार, पत्रकार, कला मर्मज्ञ, जनसेवक, समाजसेवक और न जाने क्या क्या है। भदेस भाषा में चाटुकारों को तेलू के नाम से नवाजा जाता है। दुर्भाग्य से इतिहास भी तेलू का, तेलू द्वारा और तेल मारने के लिए लिखा जाने वाला एक दस्तावेज मात्र है।
Thursday, 19 December 2013
Monday, 9 December 2013
दिल्ली ब्यूरोक्रेसी की दोहरी मार झेलेगी-
दिल्ली दिलवालों की न होकर उच्च नौकर शाहों की बन चुकी है। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह साहब पूर्व में उच्च नौकरशाही के अंग रह चुके हैं। अब पूर्व में उच्च नौकरशाही से ताल्लुक रखने वाले अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं। उनकी पत्नी अभी भी उच्च नौकरशाही की अंग हैं। दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाला आम आदमी एक बार फिर छला गया। दोबारा चुनाव चुनाव हुए तो इसकी सजा आम आदमी ही भुगतेगा। दिल्ली की जनता ने यदि मिला जुला जनादेश दिया है तो सरकार भी मिली जुली ही बननी चाहिए। असल में जनादेश के विरुद्ध सरकार न बनने देना भी आप की तानाशाही की प्रवृत्ति को प्रदर्शित करती है। यदि आप यह कहते हैं कि दिल्ली में मोदी का जादू नहीं चला तो आप गलत हैं क्योंकि मोदी न होते तो आज आम आदमी पार्टी के भ्रम जाल में फंसकर जनता उन्हें 40 से 45 सीटों पर विजयी बना देती। वैसे आज़ाद भारत में अभिजात्यों ने हमेशा आम आदमी को छला है।
दिल्ली दिलवालों की न होकर उच्च नौकर शाहों की बन चुकी है। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह साहब पूर्व में उच्च नौकरशाही के अंग रह चुके हैं। अब पूर्व में उच्च नौकरशाही से ताल्लुक रखने वाले अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं। उनकी पत्नी अभी भी उच्च नौकरशाही की अंग हैं। दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाला आम आदमी एक बार फिर छला गया। दोबारा चुनाव चुनाव हुए तो इसकी सजा आम आदमी ही भुगतेगा। दिल्ली की जनता ने यदि मिला जुला जनादेश दिया है तो सरकार भी मिली जुली ही बननी चाहिए। असल में जनादेश के विरुद्ध सरकार न बनने देना भी आप की तानाशाही की प्रवृत्ति को प्रदर्शित करती है। यदि आप यह कहते हैं कि दिल्ली में मोदी का जादू नहीं चला तो आप गलत हैं क्योंकि मोदी न होते तो आज आम आदमी पार्टी के भ्रम जाल में फंसकर जनता उन्हें 40 से 45 सीटों पर विजयी बना देती। वैसे आज़ाद भारत में अभिजात्यों ने हमेशा आम आदमी को छला है।
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