Monday, 22 April 2013

ऐसे बदलेगी औरत

बेटी, बहन, माँ और पत्नी के रूपों में औरतों को स्नेह, सम्मान, प्रेम और स्वतन्त्रता समय की मांग है। बी पी एल से नीचे जिन्दगी बसर करने वाली देश की नब्बे प्रतिशत आम जनता हो अथवा छह प्रतिशत निम्न मध्यवर्ग हो  याकि दो प्रतिशत  की आबादी वाला मध्य मध्य वर्ग और 1.5 प्रतिशत उच्च मध्यवर्गीय जनता हो और 0.5 प्रतिशत उच्च वर्ग के लोग हों, सभी जगह स्त्रियों की समान दशा नहीं है। गाँवों में खुले में शौच के कारण आए दिन हिंसक वारदातें होती रहती हैं। स्कूलों अथवा देश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम देश के भविष्य को भाग्यवादी बना रही है। नन्हीं परी और गुड़िया  मेरी प्यारी गुड़िया  जैसे पाठों को समाप्त कर झांसी की रानी जैसे पाठों को प्रत्येक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। प्रारंभिक कक्षाओं से ही लड़कियों को जूडो और कराटे सिखलाकर आत्म रक्षा के गुर सिखलाए जाएं। स्कूलों और कालेजों में शिक्षकों की आधी संख्या महिलाओं की हो। देश के पुलिस थानों में महिला पुलिस की तैनाती भी जरुरी है। इसके अलावा जरुरी है कि देश की केंद्र अथवा राज्य सरकारों में मंत्रियों की आधी संख्या महिलाओं की हो। संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित होने वाले अफसरों में आधी संख्या महिलाओं की होनी चहिए। सवाल सत्ता में महिलाओं की हिस्सेदारी का है। सत्ता प्रतिष्ठानों में महिलाओं की भागेदारी से महिलाओं की प्रस्थिति में सुधार आ सकता है। दुःख तब होता है जब जिले की महिला पुलिस कप्तान को सर कहकर संबोधित किया जाता है! क्या मैम के रूप में संबोधित होकर वह अफसरी नहीं कर सकती हैं। औरतों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को परिवर्तित किए जाने की सर्वाधिक जरुरत है।  

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