पुलिस को सियासत ने नपुंसक बना डाला है-
पुलिस का फंडा हनक पर काम करता है। इस देश की सिविल पुलिस को सियासत ने नपुंसक बना डाला है। स्वतंत्र ढंग से कार्य करने हेतु जिलों के पुलिस कप्तानों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। आई पी एस संवर्ग को राज्यों के दबाव से मुक्त किया जाना भी निहायत जरुरी है। बलात्कारियों को सरेआम चौराहों पर कोड़े लगवाकर फांसी दिलवाए जाने का संवैधानिक प्रावधान सुनिश्चित होना चाहिए। यदि किसी ने बलात्कारियों के मानवाधिकार की बात की तो उसे भी जूते मरवाए जाने का संवैधानिक प्रावधान किया जाना भी जरुरी है। और अंत में देश की जनता से एक आह्वान- "तख़्त बदल दो ताज बदल दो, क्लीवों का अभिशाप बदल दो।"।
पुलिस का फंडा हनक पर काम करता है। इस देश की सिविल पुलिस को सियासत ने नपुंसक बना डाला है। स्वतंत्र ढंग से कार्य करने हेतु जिलों के पुलिस कप्तानों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। आई पी एस संवर्ग को राज्यों के दबाव से मुक्त किया जाना भी निहायत जरुरी है। बलात्कारियों को सरेआम चौराहों पर कोड़े लगवाकर फांसी दिलवाए जाने का संवैधानिक प्रावधान सुनिश्चित होना चाहिए। यदि किसी ने बलात्कारियों के मानवाधिकार की बात की तो उसे भी जूते मरवाए जाने का संवैधानिक प्रावधान किया जाना भी जरुरी है। और अंत में देश की जनता से एक आह्वान- "तख़्त बदल दो ताज बदल दो, क्लीवों का अभिशाप बदल दो।"।
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