Monday, 13 February 2012

lokatantr pratibandhit raha




लोकतंत्र की पाठशालाएं  प्रतिबंधित रहीं
राजनीति की पाठशालाओं का प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी की सरकार में दमन हुआ l  उनको प्रतिबंधित किया गया l विश्वविद्यालयोंअथवा प्रदेश के महाविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा रखी थी l  पूरे 5 वर्ष छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए जिसका परिणाम हुआ प्रदेश की सियासत में एक भी नए नेता का जन्म हुआ l आज विभिन्न सियासी दलों प्रदेश में टिकट पाने वाला 
विधायक उम्मीदवार किसी बड़े नेता का पुत्र, पुत्री, रिश्तेदार अथवा मित्र है l युवा नेतृत्व का अभाव हो चला है l  राहुल गाँधी हों, जतिन प्रसाद हों अथवा अखिलेश यादव हों; इन लोगों को राजनीति पितृ वंशीय परंपरा में विरासत के रूप में प्राप्त हुई है l  छात्र संघ चुनाव हुए होते तो राजनीति में नेताओं का टोटा न पड़ता l  
कल्पनाथ राय, हरिकेश बहादुर, युवा अशोक तंवर, युवा कम्युनिस्ट नेता बीजू कृष्णन और युवा कम्युनिस्ट नेत्री  कविता कृष्णन आदि कई नेता देश भर के छात्रसंघों की देन रहे हैं l  विश्वविद्यालयों अथवा महाविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों से छात्र अपने आधिकारों के प्रति जागरूक रहते हैं l  विभिन्न छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालय प्रशासन के सामने रखते हुए नए युवा नेतृत्व का विकास हो जाता है l  आप सोच सकते हैं कि चुनाव न होने कि वजह से महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का टोटा पड़ गया l  छात्रों की जायज मांगों को कोई नहीं सुनने वाला है  ल आज छात्र बिना विषय अध्यापक के डिग्री ले रहा है  l 
कालेजों के प्रोफेसर्स रिटायर्ड हो रहे हैं और उने जगह नई नियुक्ति नहीं हो रही है  l  प्रतिरोध की संस्कृति को दफनाया गया है  l  लिंगदोह समिति की मान्य नियमों के मुताबिक प्रदेश भर में छात्र संघ चुनाव संभव थे  l  लेकिन इनको उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण रहा  l  मैं खुद विद्या मंदिरों में होने वाले छात्र संसद के प्रधान मंत्री पद पर छात्रों की वोटिंग द्वारा निर्वाचित हुआ था  l यह 1990 की बात है  l  बाकायदा शपथ ग्रहण समारोह हुआ था   l हम लोगों में एक अजीब सा उत्साह होता था l हम लोगों कि जिम्मेदारी होती थी कि स्कूल के किसी भी सामान को  नुकसान न पहुंचे  l  तो यह सब उन दिनों हम लोगों की मानसिक चेतना में बैठ सा गया था  l  इस तरह छात्रसंघ चुनावों से युवा नेतृत्व में जजबा भरा जाता है  ल छात्र शक्ति के भीतर  प्रतिरोधात्मक चेतना का बीजारोपण होता है  l  काश पहले की तरह छात्र संघ चुनाव फिर पूरे प्रदेश में हो पाते जिससे राजनीति में वंशवाद का खात्मा भी हो पाता l           

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