लोकतंत्र की पाठशालाएं प्रतिबंधित रहीं
राजनीति की पाठशालाओं का प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी की सरकार में दमन हुआ l उनको प्रतिबंधित किया गया l विश्वविद्यालयोंअथवा प्रदेश के महाविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा रखी थी l पूरे 5 वर्ष छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए जिसका परिणाम हुआ प्रदेश की सियासत में एक भी नए नेता का जन्म हुआ l आज विभिन्न सियासी दलों प्रदेश में टिकट पाने वाला
विधायक उम्मीदवार किसी बड़े नेता का पुत्र, पुत्री, रिश्तेदार अथवा मित्र है l युवा नेतृत्व का अभाव हो चला है l राहुल गाँधी हों, जतिन प्रसाद हों अथवा अखिलेश यादव हों; इन लोगों को राजनीति पितृ वंशीय परंपरा में विरासत के रूप में प्राप्त हुई है l छात्र संघ चुनाव हुए होते तो राजनीति में नेताओं का टोटा न पड़ता l
कल्पनाथ राय, हरिकेश बहादुर, युवा अशोक तंवर, युवा कम्युनिस्ट नेता बीजू कृष्णन और युवा कम्युनिस्ट नेत्री कविता कृष्णन आदि कई नेता देश भर के छात्रसंघों की देन रहे हैं l विश्वविद्यालयों अथवा महाविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों से छात्र अपने आधिकारों के प्रति जागरूक रहते हैं l विभिन्न छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालय प्रशासन के सामने रखते हुए नए युवा नेतृत्व का विकास हो जाता है l आप सोच सकते हैं कि चुनाव न होने कि वजह से महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का टोटा पड़ गया l छात्रों की जायज मांगों को कोई नहीं सुनने वाला है ल आज छात्र बिना विषय अध्यापक के डिग्री ले रहा है l
कालेजों के प्रोफेसर्स रिटायर्ड हो रहे हैं और उने जगह नई नियुक्ति नहीं हो रही है l प्रतिरोध की संस्कृति को दफनाया गया है l लिंगदोह समिति की मान्य नियमों के मुताबिक प्रदेश भर में छात्र संघ चुनाव संभव थे l लेकिन इनको उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण रहा l मैं खुद विद्या मंदिरों में होने वाले छात्र संसद के प्रधान मंत्री पद पर छात्रों की वोटिंग द्वारा निर्वाचित हुआ था l यह 1990 की बात है l बाकायदा शपथ ग्रहण समारोह हुआ था l हम लोगों में एक अजीब सा उत्साह होता था l हम लोगों कि जिम्मेदारी होती थी कि स्कूल के किसी भी सामान को नुकसान न पहुंचे l तो यह सब उन दिनों हम लोगों की मानसिक चेतना में बैठ सा गया था l इस तरह छात्रसंघ चुनावों से युवा नेतृत्व में जजबा भरा जाता है ल छात्र शक्ति के भीतर प्रतिरोधात्मक चेतना का बीजारोपण होता है l काश पहले की तरह छात्र संघ चुनाव फिर पूरे प्रदेश में हो पाते जिससे राजनीति में वंशवाद का खात्मा भी हो पाता l
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