आज़ादी के बाद क्या मिला? वंशानुगत शासन, पीढ़ी दर पीढ़ी क़र्ज़ चुकाते अभिशप्त किसान, बेरोज़गार युवक, साम्प्रदायिक उन्माद का दंश झेलते हिन्दू और मुसलमान, नौकरशाह के रूप में शोषक बन बैठे अपने ही बीच के आम; अब ख़ास भारतीय , सत्ता सुख के लिए सामाजिक विध्वंशक सियासी दल! सोचिये साथियों सोचिये!
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