Wednesday, 23 October 2013

मित्र! यही रोना है कि आज़ाद भारत के इतिहास में जन -पक्ष -धर सरकारें नहीं बनीं। योजनायें खाने पीने वाली ही बनीं।  कमीशन खोरी और रिश्वतखोरी  का लम्बा इतिहास है।  अपने ही लुटेरे हैं। देश के नागरिकों को खेमों में बांटा गया।  संविधान को लहू लुहान किया गया। 

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