ए मेरी मुलाक़ात तू मेरे सीने से लिपट /
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
ए मेरी मुलाक़ात तू मेरे सीने से लिपट /
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
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