Sunday, 22 January 2012

achchhi nahi hoti ki teesari kadi

दोस्तों तीसरी कड़ी पूरी होती हुई. जरा हौसला अफजाई कीजिए तो-
ए  मेरी  मुलाक़ात तू  मेरे  सीने से  लिपट /
इतनी  पाकीज़गी  भी  अच्छी  नहीं  होती /
तू  यादों  के  आईने  में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती / 
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l विनय कांत l l

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