दोस्तों एक कड़ी पूरी होती हुई l आप का स्नेह एवं आशीर्वाद चाहिए ल आप सभी को सादर नमस्कार!
ए जज़बात तू सम्हल कर चला कर/
इतनी जिन्दादिली अच्छी नहीं होती l
मेरे सपने तू भी आँखों से खुलाकर /
इतनी गहरी नींद भी अच्छी नहीं होती l
ए जज़बात................................l l विनय कांत l l
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