साथियों आज अब पूरी ग़ज़ल "अच्छी नहीं होती" सुनकर हौसला बढ़ाइए-
ए जज़बात तू सम्हल कर चला कर/
इतनी जिन्दादिली अच्छी नहीं होती l
मेरे सपने तू भी आँखों से खुलाकर /
इतनी गहरी नींद भी अच्छी नहीं होती l
ए जज़बात तू सम्हल कर चल ............. l l
ए मेरी याद तू इतनी भी उदास न हो /
यादों में मयखाने की याद अच्छी नहीं होती/
गम ए सूरत भी नहीं संवरती अब ए दोस्त/
जब अपनी परछाईयाँ भी अपनी नहीं होतीं/
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर..................l l
ए मेरी मुलाक़ात तू मेरे सीने से लिपट /
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
ए मेरी मुलाक़ात तू मेरे सीने से लिपट /
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
ए मेरी उल्फ़त अब तू उदास न हो /
आसुँओं की उफनाई अच्छी नहीं होती /
ओ सैलाब तू अब सीने में ही फफक /
दिख कर बेचारगी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर..........l l विनय कांत l l