Friday, 27 January 2012

basant aa gaya

साथियों! सुप्रभात. सुबह की सतरंगी किरणें जीवन में एक नए उत्साह का संचार करती हैं. खेतों में खिले हुए पीली सरसों  के फूल बसंत के  बसंत के आगमन पर उल्लसित हैं. देखिए! आज वे किस तरह किरणों की धुन पर थिरक रहे हैं. बसंत के आगमन पर आप सभी के लिए दो पंक्तियाँ समर्पित हैं-
मेरे गीतों में बसंत का स्वर दो!
ऐसे  उल्लास  का    छंद  रच दो! l विनय कांत l l   

Monday, 23 January 2012

poori ghazal-achchhi nahi hoti

साथियों आज अब पूरी ग़ज़ल "अच्छी नहीं होती" सुनकर हौसला बढ़ाइए-
ए जज़बात तू सम्हल कर चला कर/
इतनी जिन्दादिली अच्छी नहीं होती l
मेरे सपने तू भी आँखों से खुलाकर /
इतनी गहरी नींद भी अच्छी नहीं होती l 
ए जज़बात तू सम्हल कर चल ............. l l
ए मेरी याद तू इतनी भी उदास न हो /
यादों में मयखाने की याद अच्छी नहीं होती/
गम ए सूरत भी नहीं संवरती अब ए दोस्त/
जब अपनी परछाईयाँ भी अपनी नहीं होतीं/
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर..................l l 

ए मेरी मुलाक़ात तू मेरे सीने से लिपट /
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
ए मेरी मुलाक़ात तू मेरे सीने से लिपट /
इतनी पाकीज़गी भी अच्छी नहीं होती /
तू यादों के आईने में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l
ए मेरी उल्फ़त अब तू उदास न हो /
आसुँओं की उफनाई अच्छी नहीं होती /
ओ सैलाब तू अब सीने में ही फफक /
दिख कर बेचारगी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर..........l l विनय कांत l l
 

achchhi nahi hoti ki antim kadee

साथियों! आज ग़जल मुक्कमल होती हुई. जरा सुनिए तो- 
ए   मेरी  उल्फ़त अब  तू  उदास  न  हो  /
आसुँओं की उफनाई अच्छी नहीं होती /
ओ सैलाब तू अब सीने में ही फफक /
दिख  कर बेचारगी अच्छी नहीं होती /
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर.......l l विनय कांत l l
  

Sunday, 22 January 2012

achchhi nahi hoti ki teesari kadi

दोस्तों तीसरी कड़ी पूरी होती हुई. जरा हौसला अफजाई कीजिए तो-
ए  मेरी  मुलाक़ात तू  मेरे  सीने से  लिपट /
इतनी  पाकीज़गी  भी  अच्छी  नहीं  होती /
तू  यादों  के  आईने  में अब सूरत न दिखा /
हर रूप की कसीदाकारी अच्छी नहीं होती / 
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर................l l विनय कांत l l

Saturday, 21 January 2012

साथियों! नमस्कार l आज दूसरी कड़ी पर गौर फरमाएं-
ए मेरी याद तू इतनी भी उदास न हो /
यादों में मयखाने की याद अच्छी नहीं होती/
गम ए सूरत भी नहीं संवरती अब ए दोस्त/
जब अपनी परछाईयाँ भी अपनी नहीं होतीं/
ए मेरे जज़बात तू सम्हल कर..................l l विनय कांत l l

Friday, 20 January 2012

ai jajabaat!

दोस्तों एक कड़ी पूरी होती हुई l आप का स्नेह एवं आशीर्वाद चाहिए ल आप सभी को सादर नमस्कार! 
ए जज़बात तू सम्हल कर चला कर/
इतनी जिन्दादिली अच्छी नहीं होती l 
मेरे सपने तू भी आँखों से खुलाकर /
इतनी गहरी नींद भी अच्छी नहीं होती l  
ए जज़बात................................l l विनय कांत l l

Thursday, 19 January 2012

samhalana

ए जज़बात तू सम्हल चला कर /
इतनी जिंदादिली अच्छी नहीं होती l  l विनय कांत l  l 

Wednesday, 18 January 2012

rookhasat

वो पर्दानशीं मोहब्बत रुख़सत हो चली थी /
तब मायूसी ने आँखों से समंदर उड़ेला था  l l विनय कांत l l 

Monday, 16 January 2012

keemat

उसने बेवफाई कर मोहब्बत की कीमत चुकाई थी /
जैसे मरकर इंसान हर साँस की कीमत चुकाता है l l विनय कांत l l

rookhasat

वो रूठना मनाना और खतों को सीने से लगाना /
सब सजधजकर डोली में ससुराल रूख़सत हो चलीं l l विनय कांत l l  

Sunday, 15 January 2012

rahabari ke do kadam

खिंच उठी थी रौशनी की एक लकीर/
जब उसने दो कदम रहबरी के तय किए थे l विनय कांत l l  

Saturday, 14 January 2012

sham doston ke naam

आज की शाम दोस्तों के नाम- आदाब!
आशनाई रंग लाई थी तो रंगीन हुई थी शाम/
अब रात में भी जवां तारे हसीं नहीं होते l l  विनय कांत l l

Wednesday, 11 January 2012

कल की खुराक आज ही लीजिए बंधु!.....कल रहें न रहें-
लोकतंत्र की जुबाँ पर, पड़ गया है ताला l
जगह जगह मंच जड़ा है, नेता पहनें माला l l विनय कांत l l  
 

aankhon me samandar

यूँ जज़बात ए मोहब्बत ने रंग लाई थी / 
अब सुर्ख आँखों में समंदर तैर रहा है l l विनय कांत l l  

Tuesday, 10 January 2012

hasarat

उस   नशेमन    पर   एक   जोड़े   की   हसरत  थी
बड़ा मुत्मइन होकर सलीबों को गले लगाया था l l विनय कांत l l  

Monday, 9 January 2012

chirag ai daaman

यूं ही चिराग़ ए दामन दागदार नहीं होता
कुछ  अल्फाज़  तो  फब्तियां  रही  होंगी l l विनय कांत l l

Sunday, 8 January 2012

gaur se suniye

हर इतिहास में एक खनक और झनक होती है 
उस पायल की रुनझुन को ज़रा गौर से सुनिए l l विनय कांत l l  

Saturday, 7 January 2012

tamasha neta ka

देख  तमाशा  नेताओं  का,  डम  डमाडम  डम l 
कमीशन खाकर मोटे होते, आपस में भिड़ते हम l l विनय कांत l l    

Friday, 6 January 2012

dagadar daman

कौन किसकी ख़ता कहता ऐ दोस्त!
सभी का दामन तो दागदार निकला l l विनय कांत l l

siyasat

सियासत में कोहरे की टपक जारी थी
कितना लुभावना था पाला बदल करना! विनय कांत l l

Thursday, 5 January 2012

eka nazar idhar bhi

जरा हटके-
जनता एक सुर में बोली, राजनीति में कीचड़ है l
मंत्री बनाकर लूट मचाते, समस्या यही भीषण है l l
अधिकारी नेता पटाते, सरकार बदलने वाली है l
नेता दल मुखिया पटाते, सियासत की मक्कारी l l  
राम को मिला न छत, रहमान भी चले गए l
आरक्षण के मुद्दे से, उम्मीद बेचारी छली गई  l l  विनय कांत l l  


Wednesday, 4 January 2012

girgit sarakaren

साख गई भरोसा उठा, सरकारों से आज l
जनता नित छली गई, जारी लम्पट राज l l विनय कांत l l

Tuesday, 3 January 2012

mandir masjid

मंदिर के  घंटों मस्जिद की अजानों में खनक जारी है l  
लोकतंत्र की दुर्गति देखो यह सियासत की ऐय्यारी है l l विनय कांत l l

Monday, 2 January 2012

ai dost!

ज़िंदगी यूं ही गुजर जाती  ऐ दोस्त!
तुम सा मासूम कोई रहबर न मिला l l विनय कांत l l

ai dost!

ज़िंदगी यूं ही गुजर जाती  ऐ दोस्त!
तुम सा मासूम कोई रहबर न मिला l l विनय कांत l l

kilakari

छल छद्म भरी हंसी खुशी मुस्कुराहट का माहौल था
सहसा याद आ रही थी मासूम  की पहली किलकारी l l विनय कांत l l  

Sunday, 1 January 2012

kisan ka bojh

घड़ी की सूईयों ने बदल दी न जाने कितनी तारीखें
दुनिया भर से किसान का बोझा नहीं नहीं उतरा l l विनय कांत l l