जे एन यू में क्षरण का दौर -
जे एन यू के भारतीय भाषा केंद्र को एक बार फिर प्रोफ़ेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल जी की जरुरत है। वे छात्रों को गढ़ते हैं। इसके साथ ही डॉ आशुतोष कुमार को भी जे एन यू में ही होना चाहिए। बहुत अच्छे शिक्षक के साथ वे एक अच्छे इंसान भी हैं। एक बात यह कि जो जे एन यू अपने शिक्षकों और छात्रों की वजह से जाना जाता था, आज इसके कई शिक्षक जे एन यू के ब्रांड लेबिल की वजह से जाने जाते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक़ सी आई एल के हिन्दी विभाग की सेहत अब दुरुस्त नहीं है। अब न तो नामवर जी हैं , प्रो मैनेजर पाण्डेय हैं, न पुरुषोत्तम अग्रवाल जी हैं और न ही प्रो वीर भारत तलवार जी ही हैं। केदार जी अब क्लास नहीं लेते। गौरतलब है कि उक्त शिक्षकों के मेहनत की वजह से सी आई एल ने पूरे देश में अपनी धाक जमाई। तब डॉ राम विलास शर्मा जी को एक लेख के जवाब में पूरी किताब लिखना पड़ता था और आज ! तब यहां के प्रतिभाशाली शिक्षकों और छात्रों से देश के अन्य विश्वविद्यालयों के शिक्षक भी ईर्ष्या करते थे। अब! ..........
जे एन यू के भारतीय भाषा केंद्र को एक बार फिर प्रोफ़ेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल जी की जरुरत है। वे छात्रों को गढ़ते हैं। इसके साथ ही डॉ आशुतोष कुमार को भी जे एन यू में ही होना चाहिए। बहुत अच्छे शिक्षक के साथ वे एक अच्छे इंसान भी हैं। एक बात यह कि जो जे एन यू अपने शिक्षकों और छात्रों की वजह से जाना जाता था, आज इसके कई शिक्षक जे एन यू के ब्रांड लेबिल की वजह से जाने जाते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक़ सी आई एल के हिन्दी विभाग की सेहत अब दुरुस्त नहीं है। अब न तो नामवर जी हैं , प्रो मैनेजर पाण्डेय हैं, न पुरुषोत्तम अग्रवाल जी हैं और न ही प्रो वीर भारत तलवार जी ही हैं। केदार जी अब क्लास नहीं लेते। गौरतलब है कि उक्त शिक्षकों के मेहनत की वजह से सी आई एल ने पूरे देश में अपनी धाक जमाई। तब डॉ राम विलास शर्मा जी को एक लेख के जवाब में पूरी किताब लिखना पड़ता था और आज ! तब यहां के प्रतिभाशाली शिक्षकों और छात्रों से देश के अन्य विश्वविद्यालयों के शिक्षक भी ईर्ष्या करते थे। अब! ..........
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