फेसबुक ने अवसर दिया। पुराने मित्रों से मुलाकात हुई। कुछ नए सम्बन्ध बने। आपाधापी में भूल गया था कि किस दिन जन्म दिन आता है। ले देकर पत्नी और बच्चे जन्म दिवस की शुभ कामना देते रहे हैं । कल 1जुलाई को नईम भैया और सिद्धार्थ भाई का फोन भी आया। आज संबंधों के निभाने का सवाल महत्वपूर्ण है। अपनापन जीवन को रचनात्मक बनाता है। जन्मदिन की बधाई देने वाले सभी बड़ों को प्रणाम निवेदित है। समवयस्कों का अभिवादन और छोटों को स्नेह , जिनकी वजह से प्रतिरोध की ताकत मिलती रही है।
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