Friday, 17 July 2015

शिक्षण संस्थानों में हुकूमत की चलती है। किसी मंत्री जी का दामाद और किसी रसूखदार का अपना ही शिक्षण संस्थानों की शोभा बढ़ा रहा है। इसी वजह से शिक्षण संस्थान रसातल में धंस रहे हैं। 

Monday, 6 July 2015

जे एन यू   में क्षरण का दौर -
जे एन यू के भारतीय भाषा केंद्र को एक बार फिर प्रोफ़ेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल जी की जरुरत है।  वे छात्रों को गढ़ते हैं।  इसके साथ ही डॉ आशुतोष कुमार को भी जे एन यू में ही होना चाहिए। बहुत अच्छे शिक्षक के साथ वे एक अच्छे इंसान भी हैं। एक बात यह कि जो जे एन यू अपने शिक्षकों और छात्रों की वजह से जाना जाता था, आज इसके कई शिक्षक जे एन यू  के ब्रांड लेबिल की वजह से जाने जाते हैं।   मिली जानकारी के मुताबिक़ सी आई एल के हिन्दी विभाग की सेहत  अब दुरुस्त  नहीं है।  अब न तो नामवर जी हैं , प्रो मैनेजर पाण्डेय हैं, न पुरुषोत्तम अग्रवाल जी हैं और न ही प्रो वीर भारत तलवार जी ही हैं।  केदार जी अब क्लास नहीं लेते। गौरतलब है कि उक्त शिक्षकों के मेहनत की  वजह से सी आई एल ने पूरे देश  में अपनी धाक जमाई।  तब  डॉ राम विलास शर्मा जी को एक लेख के जवाब में पूरी किताब लिखना पड़ता था और आज ! तब  यहां के प्रतिभाशाली शिक्षकों और छात्रों से देश के अन्य विश्वविद्यालयों के शिक्षक भी ईर्ष्या करते थे। अब! .......... 
यह किताबें तकदीर नहीं बदलती -
किताबें बोझ नहीं होतीं।  संयोग से विश्वविद्यालयों के शिक्षक किताबों को बोझ बनाने पर तुले हुए हैं।  थोक के भाव चिंतनहीन किताबें लिखकर विद्यार्थियों का बेड़ा गर्क कर रहे हैं। असल में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर  से एसोसिएट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफ़ेसर से प्रोफ़ेसर बनने के लिये कुछ किताब - विताब छप जानी चाहिए, उसी  प्रक्रिया के तहत दे किताबें, दे किताबें। किताब नहीं कितबिया लिख रहे हैं। जय हो लेखक देवता की , जय हो। 

Wednesday, 1 July 2015

फेसबुक ने अवसर दिया। पुराने मित्रों से मुलाकात हुई।  कुछ नए सम्बन्ध बने।  आपाधापी में भूल गया था कि किस दिन जन्म दिन  आता है।  ले देकर पत्नी और बच्चे जन्म दिवस की शुभ कामना देते रहे हैं । कल 1जुलाई को  नईम भैया और सिद्धार्थ भाई का फोन भी आया।  आज संबंधों के निभाने का सवाल महत्वपूर्ण है। अपनापन जीवन को  रचनात्मक बनाता है। जन्मदिन की बधाई देने वाले सभी बड़ों को प्रणाम निवेदित है। समवयस्कों का अभिवादन और छोटों को स्नेह , जिनकी वजह से प्रतिरोध की ताकत मिलती रही है।