भई ! ज्ञान विज्ञान कौन देखता है. जिसने जितनी चमचई की वह उतना ही काबिल। आयोग वाले या विश्वविद्यालयों के जिम्मेदार और ओहदेदार अब एक्सपर्ट नहीं रीढ़ विहीन प्रोफेसरों को साक्षात्कार के लिए बुलाते हैं. जो टी ए और डी ए भरकर उपकृत हो जाए! जे एन यू भी अब सेटरों का गढ़ बन चुका है. सेंटर आफ इंडियन लैंग्वेज को ही देखें तो प्रो नामवर सिंह , प्रो मैनेजर पाण्डेय, प्रो पुरुषोत्तम अग्रवाल और प्रो वीर भारत तलवार जैसे कितने शिक्षक अब हैं. अब यहां के शिक्षक जे एन यू ब्रांड से जाने जाते हैं. उसी सेटिंग और जुगाड़ ने जे एन यू जैसे अकादमिक संस्थानों का भी बंटाधार किया है।
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