पूर्वांचल में दरक रही योगी की दीवार-
विनय कांत। पूरे देश में पूर्वी उत्त्तर प्रदेश की पहचान मठों और मंदिरों से होती है. ह्त्या, लूटपाट, रंगदारी और ठेकों से निकलकर पूर्वांचल की सियासत मठाधीशों के ठेलों पर जा सिमटी है. यहां धर्म की सियासत सिर चढ़कर बोलती है. गोरखपुर हो या काशी, अयोध्या हो या छोटा मोटा कोई दूसरा शहर या कस्बा, हर जगह धार्मिक सियासत की बम बम है. कभी जुबां की तो कभी हाथों में तलवार की सियासत ने ठाकुर नेताओं की पौ बारह करवाई है.
धर्म के धुरंधर मठाधीशों में सियासी हसरत का पनपना नई बात नहीं है. मठों का राजनीति से गहरा रिश्ता रहा है. पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता के लिए धर्म अफीम से भी बढ़कर है. एक दशक पहले तक काशी, गोरखपुर, अयोध्या और मथुरा सहित उत्तर प्रदेश की सियासत को धर्म ने गति प्रदान की थी. इधर नब्बे के दशक में जातिवादी राजनीति ने धर्म के दुकानदारों की बाजारी हालत की हवा निकाल दी है. हालांकि स्वयंभू मठाधीशों ने धार्मिक दावेदारी की है. मसलन हिन्दू कौन है.हम हिन्दू हैं. शिव के संतानों जागो. तुम्हें मुस्लिम जीने नहीं देगा. यदि हिन्दू चेत जाए तो भारत की तकदीर बदल जाएगी। सवाल यह है के कौन से भारत की तकदीर और कौन सा हिन्दू। धार्मिक उत्तेजना पैदा कर सियासी वोट बैंक को साधना धार्मिक नेताओं की मजबूरी है.
गोरखपुर के सांसद योगी आदित्य नाथ अक्सर उत्तेजक बयानबाजी करते हैं. हिन्दुत्त्व की सियासी फसल को तराशना उनकी मजबूरी है. दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काल्पनिक विकास मॉडल को जनता के समक्ष प्रस्तुत कर अपार सफलता हासिल किया। बी जे पी की विकास मूलक राजनीति की पिछले एक वर्ष में हवा निकल चुकी है। अब बी जे पी के पास धर्म के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं रह जाता। योगी आदित्यनाथ हों अथवा जोई अन्य बी जे पी का सांसद अथवा मंत्री। सभी भीतर से भड़काऊ बयान देने के लिए मुक्त हैं। असल बात यह है कि सभी योजना बद्ध ढंग से बी जे पी लिए काम कर रहे हैं। बी जे पी के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण है. विदेशी हो चुके भारतीय प्रधानमंत्री की देशी फ़ौज
के सियासी सूरमाओं की जुबान ही है जो सियासी रथ को कुर्सी तक पहुंचा सकती है। देश के गृहमंत्री जब अयोध्या में राम मंदिर क़ानून नहीं बना सकने की मजबूरी बतला रहे थे उसी दिन गाजियाबाद में गोरक्षनाथ पीठ के महंत एवं सांसद योगी आदित्यनाथ हिन्दू महासंघ सम्मलेन में हिन्दुओं को माला एवं भाला साथ लेकर चलने की वकालत कर रहे थे। 21 वीं शताब्दी को हिन्दू शताब्दी बतलाते हुए महंत ने हिन्दुओं को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने ललकारवादी मुद्रा में कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत और प्रत्येक हिन्दू के आगे दुनिया सिर झुकाएगी। आज हिन्दू धर्म और गो रक्षा के जरूरी है कि हर हिन्दू हाथ में माला और भाला लेकर साथ चले। जब भी किसी समुदाय ने हिन्दुओं को मिटाने की कोशिश की है तो उन्हें मुह की खानी पड़ी है। गौरतलब है कि एक तरफ हिंदुत्व के लिए पार्टी के एक नेता राजयसभा में बहुमत न होने की मजबूरी बतला रहे थे वहीं योगी अपने तीखे बोल से हिंदुत्व की सियासी फसल को अभिसिंचित कर रहे थे।
सांसद योगी आदित्यनाथ इस तरह के बयान इसलिए देते हैं कि पिछले अपने संसदीय क्षेत्र का विकास करने में वे अक्षम साबित हुए हैं. गोरखपुर सहित पूर्वांचल की व्यथा यह है कि विगत तीन दशकों से यहां की सियासत मठों, महंतों और माफियाओं के रास्ते होकर गुजरती है. गोरखपुर का खाद कारखाना अभी भी वादों की गिरफ्त में है. पूर्वाचल का चीनी उद्योग पूरी तरह चौपट हो चुका है. गोरखपुर, बस्ती,देवीपाटन मंडल के गण किसानों के गन्ना नेपाल के चीनी मीलों में भेज दिया जाता है. क्योंकि यहां मिलें समय पर गन्ना किसानों के रुपये का भुगता नहीं करती है. सड़कें भी राम भरोसे हैं. पूर्वांचल की त्रासदी तह है वीर बहादुर सिंह के बाद यहां कोई विकासमूलक नेता नहीं पैदा हुआ।
गोरखपुर परिक्षेत्र में धर्म की सियासत को इस तरह समझा जा सकता है। योगी आदित्यनाथ ने
हिन्दू युवा वाहिनी बनाई है। हिन्दू युवा वाहिनी के अधिकाँश जिलाध्यक्ष ठाकुर उपबिरादरी से हैं. प्रदेश प्रभारी राघवेन्द्र सिंह हैं। बनिया उपबिरादरी के लोग फाइनेंस करते हैं. हिन्दू युवा वाहिनी का एक भी जिलाध्यक्ष पिछड़ी अथवा दलित बिरादरी का नहीं है. विधानसभा का चुनाव हो या नगर निकायों का चुनाव हर जगह ठाकुर उप बिरादरी के लिए महाराज जी जान लड़ा देते हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से प्रेम प्रकाश तिवारी उर्फ़ जिप्पी तिवारी बी जे पी से टिकट के दावेदार थे. जिप्पी जिप्पी का क्षेत्र बदलकर उन्हें माता प्रसाद पाण्डेय के खिलाब बी जे पी उमेदवार बनवाया गया और डुमरियागंज में हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनवाया गया। सूत्र बताते हैं की पूर्वांचल के टिकट वितरण में महराज जी
की खूब चलती है. वैसे तो आम तौर पर लोग महराज जी पर प्रतिक्रिया बचते हैं लेकिन रतन सेन डिग्री कालेज की पूर्व एसोशिएट प्रोफ़ेसर डॉ ज्योतिमा राय कहती हैं कि योगी जी को मंदिर में पूजा अर्चना पर ध्यान देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति धार्मिक नेता है तो उसे राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। धर्म का स्थान बहुत ऊंचा है।
विनय कांत। पूरे देश में पूर्वी उत्त्तर प्रदेश की पहचान मठों और मंदिरों से होती है. ह्त्या, लूटपाट, रंगदारी और ठेकों से निकलकर पूर्वांचल की सियासत मठाधीशों के ठेलों पर जा सिमटी है. यहां धर्म की सियासत सिर चढ़कर बोलती है. गोरखपुर हो या काशी, अयोध्या हो या छोटा मोटा कोई दूसरा शहर या कस्बा, हर जगह धार्मिक सियासत की बम बम है. कभी जुबां की तो कभी हाथों में तलवार की सियासत ने ठाकुर नेताओं की पौ बारह करवाई है.
धर्म के धुरंधर मठाधीशों में सियासी हसरत का पनपना नई बात नहीं है. मठों का राजनीति से गहरा रिश्ता रहा है. पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता के लिए धर्म अफीम से भी बढ़कर है. एक दशक पहले तक काशी, गोरखपुर, अयोध्या और मथुरा सहित उत्तर प्रदेश की सियासत को धर्म ने गति प्रदान की थी. इधर नब्बे के दशक में जातिवादी राजनीति ने धर्म के दुकानदारों की बाजारी हालत की हवा निकाल दी है. हालांकि स्वयंभू मठाधीशों ने धार्मिक दावेदारी की है. मसलन हिन्दू कौन है.हम हिन्दू हैं. शिव के संतानों जागो. तुम्हें मुस्लिम जीने नहीं देगा. यदि हिन्दू चेत जाए तो भारत की तकदीर बदल जाएगी। सवाल यह है के कौन से भारत की तकदीर और कौन सा हिन्दू। धार्मिक उत्तेजना पैदा कर सियासी वोट बैंक को साधना धार्मिक नेताओं की मजबूरी है.
गोरखपुर के सांसद योगी आदित्य नाथ अक्सर उत्तेजक बयानबाजी करते हैं. हिन्दुत्त्व की सियासी फसल को तराशना उनकी मजबूरी है. दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काल्पनिक विकास मॉडल को जनता के समक्ष प्रस्तुत कर अपार सफलता हासिल किया। बी जे पी की विकास मूलक राजनीति की पिछले एक वर्ष में हवा निकल चुकी है। अब बी जे पी के पास धर्म के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं रह जाता। योगी आदित्यनाथ हों अथवा जोई अन्य बी जे पी का सांसद अथवा मंत्री। सभी भीतर से भड़काऊ बयान देने के लिए मुक्त हैं। असल बात यह है कि सभी योजना बद्ध ढंग से बी जे पी लिए काम कर रहे हैं। बी जे पी के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण है. विदेशी हो चुके भारतीय प्रधानमंत्री की देशी फ़ौज
के सियासी सूरमाओं की जुबान ही है जो सियासी रथ को कुर्सी तक पहुंचा सकती है। देश के गृहमंत्री जब अयोध्या में राम मंदिर क़ानून नहीं बना सकने की मजबूरी बतला रहे थे उसी दिन गाजियाबाद में गोरक्षनाथ पीठ के महंत एवं सांसद योगी आदित्यनाथ हिन्दू महासंघ सम्मलेन में हिन्दुओं को माला एवं भाला साथ लेकर चलने की वकालत कर रहे थे। 21 वीं शताब्दी को हिन्दू शताब्दी बतलाते हुए महंत ने हिन्दुओं को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने ललकारवादी मुद्रा में कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत और प्रत्येक हिन्दू के आगे दुनिया सिर झुकाएगी। आज हिन्दू धर्म और गो रक्षा के जरूरी है कि हर हिन्दू हाथ में माला और भाला लेकर साथ चले। जब भी किसी समुदाय ने हिन्दुओं को मिटाने की कोशिश की है तो उन्हें मुह की खानी पड़ी है। गौरतलब है कि एक तरफ हिंदुत्व के लिए पार्टी के एक नेता राजयसभा में बहुमत न होने की मजबूरी बतला रहे थे वहीं योगी अपने तीखे बोल से हिंदुत्व की सियासी फसल को अभिसिंचित कर रहे थे।
सांसद योगी आदित्यनाथ इस तरह के बयान इसलिए देते हैं कि पिछले अपने संसदीय क्षेत्र का विकास करने में वे अक्षम साबित हुए हैं. गोरखपुर सहित पूर्वांचल की व्यथा यह है कि विगत तीन दशकों से यहां की सियासत मठों, महंतों और माफियाओं के रास्ते होकर गुजरती है. गोरखपुर का खाद कारखाना अभी भी वादों की गिरफ्त में है. पूर्वाचल का चीनी उद्योग पूरी तरह चौपट हो चुका है. गोरखपुर, बस्ती,देवीपाटन मंडल के गण किसानों के गन्ना नेपाल के चीनी मीलों में भेज दिया जाता है. क्योंकि यहां मिलें समय पर गन्ना किसानों के रुपये का भुगता नहीं करती है. सड़कें भी राम भरोसे हैं. पूर्वांचल की त्रासदी तह है वीर बहादुर सिंह के बाद यहां कोई विकासमूलक नेता नहीं पैदा हुआ।
गोरखपुर परिक्षेत्र में धर्म की सियासत को इस तरह समझा जा सकता है। योगी आदित्यनाथ ने
हिन्दू युवा वाहिनी बनाई है। हिन्दू युवा वाहिनी के अधिकाँश जिलाध्यक्ष ठाकुर उपबिरादरी से हैं. प्रदेश प्रभारी राघवेन्द्र सिंह हैं। बनिया उपबिरादरी के लोग फाइनेंस करते हैं. हिन्दू युवा वाहिनी का एक भी जिलाध्यक्ष पिछड़ी अथवा दलित बिरादरी का नहीं है. विधानसभा का चुनाव हो या नगर निकायों का चुनाव हर जगह ठाकुर उप बिरादरी के लिए महाराज जी जान लड़ा देते हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से प्रेम प्रकाश तिवारी उर्फ़ जिप्पी तिवारी बी जे पी से टिकट के दावेदार थे. जिप्पी जिप्पी का क्षेत्र बदलकर उन्हें माता प्रसाद पाण्डेय के खिलाब बी जे पी उमेदवार बनवाया गया और डुमरियागंज में हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनवाया गया। सूत्र बताते हैं की पूर्वांचल के टिकट वितरण में महराज जी
की खूब चलती है. वैसे तो आम तौर पर लोग महराज जी पर प्रतिक्रिया बचते हैं लेकिन रतन सेन डिग्री कालेज की पूर्व एसोशिएट प्रोफ़ेसर डॉ ज्योतिमा राय कहती हैं कि योगी जी को मंदिर में पूजा अर्चना पर ध्यान देना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति धार्मिक नेता है तो उसे राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। धर्म का स्थान बहुत ऊंचा है।
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