Saturday, 30 November 2013

दीपक की लौ

दीपक की लौ  
नगर के सभी मकानों में  
बेहद खूबसूरती बिखेर रही थी 
अगली सुबह  टूटे हुए थे दीये  
बच्चे तराजू बनाकर खेल चुके थे दीये  
तराजू का खेल 
तो बच्चे सीख रहे थे 
उन दीयों से व्यापार। 
अगले दिन वे दीये खंडित थे 
हर उजाले के बाद 
दीपक की तरह बुझता  है सच! 

Tuesday, 26 November 2013

तो अब झूठ बोलें 
फैलायें नफ़रत की आग
दुनिया भर में  
प्रेम 
और 
सच बोलने पर 
फांसी 
और 
सजा ए मौत 
का फरमान
बन चुकी है  
परम्परा और विरासत! 

Friday, 15 November 2013

देश के युवाओं को काम चाहिए

देश के युवाओं को काम चाहिए-
भारतीय सियासत मुफ्तखोरी सिखलाती है।  सियासी दल आम जनता से वादे करते हैं कि हमारी सरकार बनने पर राज्य अथवा राष्ट्र में मुफ्त में अनाज वितरित होंगे। इस मुल्क की अवाम को "मुफ्तखोरी" नहीं बल्कि काम चाहिए। राष्ट्र की वर्त्तमान राजनीति को "कर्मशील भारत" का स्वप्न देखना चाहिए।कर्मशील स्वप्न से ही नक्सलवाद जैसी कई समस्याओं का अंत सम्भव है।