Thursday, 28 March 2013

मुल्क की सियासत

मुल्क की सियासत में दीमक लग चुके हैं। हर इंसान परेशान है। वह सोचता है कि आने दो बच्चू अबकी बारी चुनावों में नेता जी को सबक सिखाएंगे। चुनाव आता है तब तक जीता हुआ जनप्रतिनिधि बाहुबली और माननीय के रूप में तब्दील हो जाता है। कौन जाए आफत मोल लेने……। भारतीय लोकतांत्रिक संस्करण में सभी छोटे मोटे सामंत विधायक और सांसद बन चुके हैं। बड़े पूंजीपतियों के लिए राज्य सभा का दरवाजा खुला रहता है।   

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